राहुल गांधी की गारंटी पर ही विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का साथ देगा पीडीएफ

कांग्रेस के केंद्रीय आलाकमान की दूत बनकर अस्थायी राजधानी देहरादून आयी अंबिका सोनी वापस दिल्ली लौट गई हैं. अपनी चौबीस घंटे की यात्रा में अंबिका सोनी ने सरकार और संगठन से लेकर कांग्रेस व पीडीएफ के बीच विवादों को सुलझाने की खूब कोशिश की. लेकिन चुनावी रणनीति और तालमेल को लेकर पीडीएफ ने साफ कह दिया है कि बात कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ ही होगी.

कांग्रेस और पीडीएफ के पेंच सुलझाने को लेकर कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी ने कोशिश जरूर की, लेकिन रास्ता निकलता दिख नही रहा. पीडीएफ संयोजक मंत्री प्रसाद नैथानी और दिनेश धनै ने सोनी से मुलाकात में किशोर उपाध्याय और उनके समर्थकों को लेकर कड़ा तेवर अपनाया. नैथानी और धनै ने साफ कर दिया है कि राहुल गांधी से मुलाकात होने पर ही कांग्रेस के साथ किसी तरह के चुनावी समझौते का ख़ाका खिंच सकता है.

एक तरफ विपक्षी बीजेपी सत्ता परिवर्तन के लिए सड़कों पर उतर चुकी है, तो दूसरी तरफ सत्ताधारी कांग्रेस में सरकार-संगठन में गिले-शिकवे दूर करने को बैठकों का दौर ही चल रहा है. ऊपर से प्रदेश कांग्रेस और पीडीएफ का पेंच सुलझाने को लेकर भी खासी मेहनत करनी पड़ रही है. कलह थामने के लिए प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी ने पहले दिन हरीश रावत और किशोर उपाध्याय से लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की.

सोनी ने दौरे के दूसरे दिन पीडीएफ नेता मंत्री प्रसाद नैथानी और दिनेश धनै को बुलाकर पीसीसी चीफ एंड कंपनी से मिले गिले-शिकवों को दूर करने की कोशिश की. अंबिका सोनी ने फिर दोहरा दिया है कि पीडीएफ के साथ कैसा चुनावी तालमेल बने, इसका जिम्मा हाईकमान ने मुख्यमंत्री को ही दिया है.

दरअसल, कांग्रेस आलाकमान पार्टी सरकार और संगठन में छिड़ी जंग से ज्यादा पीडीएफ के साथ फंसे पेंच से हलकान है! पार्टी रणनीतिकार मानते हैं कि सरकार के साझीदार पीडीएफ के साथ चुनावी तालमेल रहेगा तो दो-तीन सीटों का फ़ायदा होगा! हालांकि कांग्रेस के टिकट पर या कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने पर पीडीएफ बंटता दिख रहा है.

पीडीएफ से जुड़े सूत्र बताते हैं कि मंत्री प्रसाद नैथानी और हरीशचन्द्र दुर्गापाल कांग्रेस के साथ किसी भी फॉर्मेट में रहना चाहते हैं, लेकिन दिनेश धनै और प्रीतम पंवार सारे विकल्प खुले रखना चाहते हैं. बहरहाल, कांग्रेस और पीडीएफ के रिश्तों में इतने पेंच हैं कि उन्हें सुलझाना अंबिका सोनी के बस की बात नहीं रही. बिखरा ही सही लेकिन पीडीएफ चाहता है कि चुनावी तालमेल पर चर्चा हो तो सिर्फ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ हो. यानी पीडीएफ के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर कोई अहमियत नहीं रखते.