‘विजय माल्या के मन में न कानून का सम्मान है न वे भारत लौटना चाहते हैं’

संकट में फंसे शराब कारोबारी विजय माल्या को शुक्रवार को दोहरा झटका लगा. दो अदालतों ने अलग-अलग आपराधिक मामलों में माल्या के खिलाफ दो गैर जमानती वॉरंट जारी किए. अदालतों ने निष्कर्ष दिया कि माल्या के मन में न तो कानून के लिए सम्मान है और न ही उनकी भारत लौटने की मंशा है.

एक अदालत ने कहा कि माल्या के खिलाफ सीधे जबरिया कार्रवाई की जा सकती है क्योंकि उनकी ओर से ऐसा कुछ दिख नहीं रहा है कि वह अदालत के फैसले का सम्मान करेंगे.

दिल्ली की एक अदालत ने 2012 में चैक बाउंस होने के एक मामले में किंगफिशर एयरलाइंस के चेयरमैन विजय माल्या के खिलाफ दूसरा गैर जमानती वारंट शुक्रवार को जारी किया. यह वारंट माल्या के अदालत में हाजिर नहीं होने पर जारी किया गया है.

एक अदालत ने जहां माल्या के खिलाफ फेरा उल्लंघन मामले में कथित रूप से समन से बचने के लिए माल्या के खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया. यह मामला प्रवर्तन निदेशालय ने दर्ज कराया था. एक अन्य अदालत ने दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा लि. (डायल) द्वारा 2012 में दायर चेक बाउंस मामले में माल्या के खिलाफ गैर जमानती वॉरंट जारी किया.

प्रवर्तन निदेशालय के मामले की सुनवाई कर रहे मुख्य मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट सुमित दास ने कहा कि माल्या की यह दलील कि वह पासपोर्ट नहीं होने की वजह से ‘पंगु’ हो चुके हैं और भारत नहीं आ सकते, स्पष्ट रूप से बदनियत है और कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग को दर्शाती है.

अदालत ने कहा, इससे लगता है कि आरोपी के मन में कानून को लेकर सम्मान नहीं है और न ही उनका वापस लौटने का इरादा है. अदालत ने कहा कि ऐसे में आरोपी के खिलाफ जबरिया कार्रवाई की जानी चाहिए. अदालत ने इस मामले की सुनवाई की तारीख 22 दिसंबर तय की है और प्रवर्तन निदेशालय से वॉरंट को तामील करवाने को कहा है.

चेक बाउंस मामले में मेट्रोपोलिटिन मजिस्ट्रेट सुमित आनंद ने आदेश जारी करते हुए निर्देश दिया कि इस गैर जमानती वॉरंट की तामील विदेश मंत्रालय के माध्यम से करवाई जाए, क्योंकि रपटों के अनुसार माल्या लंदन में है. मामले में अगली सुनवाई चार फरवरी को होगी.

उल्लेखनीय है कि अदालत ने छह अगस्त को भी माल्या के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था और कहा था कि उनकी हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य कदम उठाए जाने की जरूरत है.