नेपाल में ‘दोस्ती का मिशन’ पूरा कर वापस लौटे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नेपाल की तीन दिन की राजकीय यात्रा के बाद शुक्रवार को स्वदेश लौट आए. उन्होंने इसे ‘दोस्ती का मिशन’ करार दिया, जिसने साझा सहयोगपरक प्रयासों को नई गतिशीलता प्रदान की है.

अठारह साल में इस हिमालयी पड़ोसी की यात्रा करने वाले पहले राष्ट्रपति मुखर्जी ने दोनों देशों के बीच यदा-कदा शिथिलता को ‘एक परिवार में मतभेद’ करार दिया.

उन्होंने पोखरा की यात्रा पूरी करने के बाद कहा, ‘हमारा भविष्य एक-दूसरे से जुड़ा है और साझा समृद्धि को आगे बढ़ाने की जरूरत दोनों ओर महसूस की जाती है. भारत नेपाल को शांति, स्थायित्व और विकास के उसके जज्बे में सहयोग देने के लिए कटिबद्ध है.’

उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्ष सहमत हैं कि अब ध्यान नेपाल में वर्तमान द्विपक्षीय विकास एवं कनेक्टिविटी परियोजना तथा भूकंप पश्चात पुनर्निर्माण परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर जाना चाहिए.’

प्रणब मुखर्जी ने कहा, ‘नेपाल की मेरी यात्रा ‘दोस्ती का मिशन’ रही है और यह उस प्राथमिकता को दर्शाती है जो भारत नेपाल के साथ अपने अनोखे संबंध को आगे बढ़ाने के लिए देता है.’

मुखर्जी के साथ रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे, कांग्रेस राज्यसभा सदस्य भुवनेश्वर कालिता, बीजेपी सांसद एन. गणेशन, जगदंबिका पाल और आर.के. सिंह नेपाल गए थे.

अपनी इस यात्रा के दौरान मुखर्जी ने अपनी समकक्ष विद्यादेवी भंडारी, उपराष्ट्रपति नंद बहादुर पुन, प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड से भेंट वार्ता की.

मुखर्जी ने कहा कि उन्होंने भंडारी को भारत आने का न्योता दिया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया.