भोपाल जेलब्रेक के दौरान 80 गार्ड कर रहे थे नेताओं और अफसरों की चाकरी

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की सेंट्रल जेल से आतंकियों के भागने के मामले में एक और चौंकाने वाली लापरवाही का खुलासा हुआ है. जेल में कैदियों की निगरानी के लिए 160 प्रहरियों में 80 प्रहरी सीएम सचिवालय, मंत्रियों के बंगलों और अफसरों की चाकरी में लगाए गए हैं.

भोपाल सेंट्रल जेल में सिमी के 29 आतंकियों को रखा गया था, जिनमें से आठ आतंकी दिवाली की रात फरार हो गए थे. जेल में इतने कुख्यात कैदी बंद होने के बावजूद सुरक्षा में कोताही बरती गई.

बताया जा रहा है कि जेल की सुरक्षा के लिए 160 प्रहरियों को पदस्थ किया गया था. लेकिन यह व्यवस्था केवल कागजों तक ही सीमित रही थी. इनमें से 80 प्रहरियों की ड्यूटी जेल से बाहर की गई थी.

दिग्विजय सिंह ने जेल प्रहरियों को बंगलों पर चाकरी में लगाने के मामले में शिवराज सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि, भोपाल जेल स्टाफ़ के 60 पद रिक्त, 8० मुख्यमंत्री की वीआईपी सुरक्षा में.
एक अन्य ट्वीट में दिग्विजय सिंह ने लिखा, ‘यह है मध्य प्रदेश शासन व प्रशासन के गुड गवर्नेंस का नमूना. शिवराज चौहान के पास ज़बानी जमा ख़र्च और गप्पों के अलावा कुछ नहीं है.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के छोर पर बनी जेल में गार्ड के लिए 250 पद हैं, जिनमें से 31 रिक्त हैं. इन गार्डों में से 70 ट्रेनी हैं. टंगक्लीनर, चादरों, और बर्तनों की मदद से आठ कैदियों के फरार हो जाने को देखते हुए यह हिसाब काफी चिंताजनक है.

दीवाली की रात को आठ कैदियों ने टंगक्लीनरों से बनी चाबियों की मदद ली, स्टील की पैनाई हुई प्लेटों से एक गार्ड का गला रेत दिया, और चादरों को जोड़कर 30-30 फुट ऊंची दो दीवारें फांदकर फरार हो गए. यह तथ्य चकराने वाले हैं कि इन हरकतों पर किसी की नज़र क्यों नहीं पड़ी.

इसके बाद वे कैदी जेल से लगभग 10 किलोमीटर दूर एक गांव की तरफ पैदल ही गए, और बाद में पुलिस ने मुठभेड़ में सभी को मार गिराया.

इसके बाद सामने आए मुठभेड़ के वीडियो की वजह से कार्रवाई पर कई सवालिया निशान लगे, जिन्हें देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने एक पूर्व जज द्वारा जेलब्रेक तथा मुठभेड़ की जांच करवाने के आदेश दे दिए हैं.