चमोली : 8 साल में करोड़ों खर्च, फिर भी स्टेडियम का नामो निशान नहीं!

सरकारी धन की बर्बादी की खबरें तो आपने खूब सुनी होंगी. लेकिन इसे कैसे ठिकाने लगाया जाता है, इसकी एक बानगी चमोली जिले में देखी जा सकती है. यहां के पोखरी में खिलाडियों की प्रतिभा को निखारने के लिए एक स्टेडयम बनाया जाना था. लेकिन आठ साल बीत जाने के बाद भी आज तक स्टेडयम नहीं बन पाया है. लेकिन 80 फीसदी लागत अब तक ठिकाने लग चुकी है.

चमोली के पोखरी विनायक धार क्षेत्र में आउटडोर और इनडोर स्पोर्ट्स स्टेडयम बनना था, लेकिन कार्यदायी संस्था व खेल विभाग की लापरवाही के चलते यह काम मामूली खेल मैदान से आगे नहीं बढ़ पाया है. तीन करोड़ तीस लाख की लागत वाले इस स्टेडयम में अब तक ढाई करोड़ खर्च कर दिए गए हैं.

यही नहीं स्टेडियम की जो बाहरी दीवार बनाई गई थी, वह भी घटिया निर्माण के चलते आधी टूट गई है. जिससे आसपास के घरों के लिए बरसात के समय भारी खतरा पैदा हो गया है. स्थानीय लोग जहां इससे परेशान हैं. वहीं विभाग द्वारा इस में अब तक खर्च की गई राशि की भी जानकारी नहीं दी जा रही है.

साल 2008 में शुरू हुए इस स्टेडयम निर्माण का उत्तर प्रदेश निर्माण निगम कर रहा है. आठ साल बीतने के बाद भी जहां चालीस फीसदी काम नहीं हो पाया है. वहीं जो हुआ भी है वह घटिया निर्माण के चलते टूटने लगा है. वहीं खेल विभाग का रटा-रटाया जबाब कि इस पर जांच चल रही है.

इस स्टेडयम निर्माण में जहां पहले भी कई बार घटिया निर्माण कार्यों को लेकर शिकायत व आंदोलन हुए हैं, वहीं शासन प्रशासन इस पर कार्रवाई करने के बजाय फिर से जिला योजना में अतिरिक्त बजट खर्च करने की जुगत में लगा है.