कल तक कालागढ़ खाली करने के निर्देश, आदेश का पालन न करने पर सख्ती कार्रवाई की चेतावनी

वन विभाग के रहमोकरम पर अपनी आखिरी सांसे गिन रहें कालागढ़ शहर की रही-सही उम्मीद भी अब दम तोड़ने लगी है. दरअसल एनजीटी के निर्देश पर वन विभाग ने यहां निवास करने वाले 751 परिवारों को कालागढ़ छोड़ने का फरमान जारी करते हुए, उन्हें बेदखली का फरमान सुना दिया है.

हालांकि कालागढ़ के भविष्य को लेकर एनजीटी में 20 नवम्बर को भी अगली सुनवाई होनी है, लेकिन वन विभाग ने उससे पहले ही कोटद्वार प्रशासन को चिट्ठी लिखकर तत्काल कालागढ़ को खाली करवाने का फरमान जारी कर दिया है.

अविभाजित उत्तर प्रदेश के शासनकाल में वन विभाग की भूमि पर 1972 में बसाए गए कालागढ़ शहर की अब अंतिम सांसे भी जवाब देने लगी हैं. दरअसल एशिया के कच्चे बांधों में सबसे बड़े रामगंगा बांध के निर्माण और उसकी जरूरतों को पूरा करने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा बसाए गए कालागढ़ शहर को अब वन विभाग ने अपनी भूमि खाली करने का फरमान जारी कर दिया है.

कालागढ़ में वर्तमान समय में निवास करने वाले कुल 964 परिवारों में से 751 परिवारों अवैध कब्जाधारी घोषित करते हुए विभाग के निर्देश पर कोटद्वार प्रशासन ने 5 नवम्बर से पहले कालागढ़ खाली करने के फरमान जारी कर दिए हैं.

हालांकि कोटद्वार प्रशासन द्वारा पूर्व में कालागढ़ में निवासी करने वाले भूमिहीन लोगों से एक एफिडेविट मांगा गया था. जिसके आधार पर उनके पुनर्वास की समस्या का समाधान किया जाना था. लेकिन जानकारी के आभाव में मात्र 213 परिवारों द्वारा ही प्रशासन को बताया गया कि वह वास्तव में भूमिहीन है. ऐसे में कालागढ़ में 751 परिवार जो किन्हीं कारणों से समय पर एफिडिवेट जमा नहीं कर पाए उन पर अब कालागढ़ से बेदखली की तलवार लटक गई है.

इधर दूसरी ओर प्रशासन के रुख को देखते हुए कालागढ़ बचाने के लिए राजनीतिक पार्टियों ने इसमें कूदते हुए प्रशासन के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है. कालागढ़ में सालों से निवास कर रहें जिन 751 परिवारों को प्रशासन ने अवैध कब्जेधारी घोषित किया है. उनका साफ कहना है कि जब तक उन लोगों का भी पुनर्वास नहीं हो जाता तब तक वह कालागढ़ से नहीं जाने वाले.

उधर दूसरी ओर वन विभाग द्वारा कोटद्वार प्रशासन से कालागढ़ को खाली करवाने के लिए कहा गया है. जिस पर एसडीएम कोटद्वार राकेश चंद तिवारी का कहना है कि सभी 751 परिवारों को नोटिस देकर 5 नवम्बर तक सरकारी मकान खाली करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं. यदि इस अवधि के बाद कोई मकान खाली नहीं करता है तो फिर सख्ती के साथ सरकार मकान खाली करवाने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.