चमोली : पीएम मोदी के माणा नहीं पहुंचने से मायूस हुए ITBP जवान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवाली के मौके पर चमोली जिले में माणा पोस्ट न पहुंचने से दो दिन से इंतजार कर रहे जवानों में मायूसी तो है, लेकिन उन्हें यह खुशी भी है कि प्रधानमंत्री हिमाचल के किन्नौर में उनके भाइयों के बीच मौजूद थे. माणा में आइटीबीपी के असिस्टेंट कमांडेंट अनूप गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री के आने की सूचना से जवानों का उत्साह चरम पर था.

उन्होंने कहा, माणा पोस्ट पर जवानों को रविवार को दोपहर बाद सूचना मिली कि वह हिमाचल के किन्नौर में हैं. यह हमारे लिए खुशी की बात है कि माणा न सही, लेकिन वह जहां भी हैं हमारे भाइयों के बीच हैं.

केंद्र में सत्ता संभालने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर दीपावली सीमा पर जवानों के साथ मनाते आए हैं. इससे पहले वह 2014 में सियाचिन और 2015 में अमृतसर में जवानों के साथ दीपावली मना चुके हैं. इस बार उम्मीद थी कि वह समुद्रतल से साढ़े ग्यारह हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित माणा पोस्ट पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के जवानों के साथ दीपावली मनाएंगे.

बता दें कि माणा तिब्बत सीमा के पास उत्तराखंड में देश का अंतिम गांव भी है. प्रधानमंत्री के आगमन की चर्चा से गांव के साथ ही जवानों में भी उत्साह था. हरिद्वार के सांसद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक पहुंचे तो लगा कि प्रधानमंत्री का आना तय है.

सभी की नजरें रह-रह कर आसमान की ओर उठ रही थीं. हालांकि शासन और प्रशासन दो दिनों से असमंजस में थे, लेकिन तैयारियां पूरी थीं. इस बीच रेडियो पर ‘मन की बात’ में यह दीपावली सेना और सुरक्षा बलों के जवानों को समर्पित करने का ऐलान किया तो वहां मौजूद जवानों और नागरिकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया. उन्हें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री कुछ ही पलों में उनके बीच होंगे.

रविवार को दोपहर बाद एकाएक खबर आई की प्रधानमंत्री हिमाचल के किन्नौर में जवानों के साथ दीपावली मना रहे हैं. इसी दौरान सुरक्षा का घेरा उठना शुरू हुआ तो सबको अहसास हो गया कि प्रधानमंत्री का दौरा स्थगित हो चुका है.

उच्च हिमालयी क्षेत्र में बसा माणा गांव में करीब 200 परिवार रहते हैं. इनकी आजीविका का मुख्य साधन कृषि और भेड़ पालन है. यहां के वाशिंदे महज छह महीने ही यहां रहते हैं. बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद गांव की रौनक बढ़ जाती है और शीतकाल में कपाट बंद होते ही सभी परिवार चमोली में गोपेश्वर के पास बसे सात गांवों में लौट आते हैं. शीतकाल में सभी ग्रामीण यहीं रहते हैं.