मसूरी वन प्रभाग का कमाल | जंगलों को आग से बचाएगी पिरुल से बनाई गई जैविक खाद

उत्तराखंड में हर साल हजारों हेक्टेयर जंगल पिरुल (चीड़ के पत्ते) के कारण आग से तबाह हो रहे हैं. लेकिन आज तक पिरुल का कोई कारगर उपाय किसी ने नहीं निकाला है. लेकिन अब मसूरी वन प्रभाग ने पिरुल का उपयोग जैविक खाद बनाने के लिए शुरू कर दिया है.

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में अधिकांश वन क्षेत्र चीड़ के हैं. जिससे हर साल पिरुल पर आग लगने से हजारों हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर राख हो रहा है. इस वजह से पर्यावरण क्षति के साथ ही वन संपदा को भी भारी नुकसान हो रहा है.

मसूरी वन विभाग के क्षेत्रीय वन अधिकारी मनमोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि 24 घन मीटर में 24 क्विंटल पिरुल से जैविक खाद बनाने का सफल प्रयोग किया है. करीब 70 हेक्टेयर वन क्षेत्र से पिरुल को इकट्ठा कर खाद बनाई गई है.

पिरुल से खाद बनाने के लिए पहले पिरुल का भुसा बनाकर उसमें जैविक कंपाउड नेचर वैल लिक्विड मिलाकर कम्पोस्ट पिट में डालकर ढक दिया जाता है. दो माह में पिरुल से जैविक खाद तैयार हो जाती है.

स्थानीय निवासी जमुना देवी नौटियाल ने कहा कि पहली बार पिरुल से खाद बनाने की प्रक्रिया को देखा उन्होंने वन विभाग से ग्रामीणों को इससे जोड़ने की मांग की है. वहीं कृषि एक्टपर्ट विमल कुमार का कहना है कि पिरुल से बनाई गई खाद किसानों के हित के लिए अच्छी है.

पिरुल से जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया को अगर बड़े पैमाने पर शुरू किया जाए तो उत्तराखंड के जंगल आग से बचेंगे. साथ ही उत्तराखंड के किसानों को घर में रोजगार मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी.