LoC पर आतंकियों से लोहा लेते हुए दून का लाल शहीद, आज हरिद्वार में होगा अंतिम संस्कार

जम्मू-कश्मीर में एलओसी पर पाकिस्तानी आतंकवादियों की घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए देहरादून का लाल शहीद हो गया. शहीद के पार्थिव शरीर को शुक्रवार दोपहर बाद देहरादून लाया गया, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

दीवाली की तैयारी में जुटे शहीद के परिवार को जब इस अनहोनी की खबर मिली तो मानो उन पर आसमान टूट पड़ा. परिजन विलाप करने लगे. शहीद की मां आशा देवी रावत का रो-रोकर बुरा हाल है. बेटे की शहादत की खबर मिलते ही उसके परिवार में कोहराम मच गया.

6 गढ़वाल राइफल्स के संदीप सिंह रावत कुपवाड़ा के तंगधार सेक्टर में तैनात थे. गुरुवार दोपहर तंगधार सेक्टर में साथियों के साथ पेट्रोलिंग पर थे. इसी दौरान एलओसी पर संदिग्धों के दिखने पर जवानों ने ललकारा तो इन्होंने जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी. गोलीबारी में संदीप सिंह रावत शहीद हो गए जबकि उनका एक साथी घायल हो गया.

गढ़वाल राइफल्स के जवान संदीप सिंह रावत मूलरूप से पौड़ी जिले में धूमाकोट क्षेत्र के घोडपाला गांव का रहने वाला था और साल 2004 में देहरादून के नवादा में घर बनाया था. दो साल पहले देशसेवा का जज्बा लिए हुए उन्होंने सेना की नौकरी ज्वाइन की थी. संदीप का पार्थिव शरीर शुक्रवार दोपहर बाद देहरादून लाया गया.

वर्तमान में वह गढ़वाल राइफल्स की छठवीं बटालियन (छह गढ़वाल राइफल्स) में तैनात था. जानकारी के मुताबिक अंतिम दर्शन के बाद शहीद की अंत्येष्टि सैन्य सम्मान के साथ हरिद्वार में की जाएगी. बता दें कि अब सीमा पर अगले तीन दिन हाई अलर्ट किया गया हैं.

बॉक्सर भी था संदीप रावत
देहरादून के नवादा का रहने वाला राइफलमैन संदीप साल 2015 में स्पोर्टस कोटे से सेना में भर्ती हुआ था. वह बेहतरीन बॉक्सर था. शहीद संदीप के पिता हवलदार हरेन्द्र सिंह रावत भी दसवीं गढ़वाल राइफल्स के सेवानिवृत्त हवलदार हैं. वर्तमान में वह दून मेडिकल कॉलेज की टीचिंग अस्पताल (दून अस्पताल) में सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर रहे हैं.

शहीद राइफलमैन संदीप का बड़ा भाई दीपक रावत दुबई स्थित एक होटल में नौकरी करता है. पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक शहीद संदीप सिंह की प्रारंभिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से हुई थी. इंटरमीडिएट की परीक्षा ओपन बोर्ड से उर्तीण की थी.

वह उत्तराखंड पुलिस कांस्टेबल भर्ती में भी सफल हुआ था लेकिन वर्ष 2015 में उसने फौज को वरीयता दी. लैंसडाउन से रिक्रूट का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद संदीप ने गढ़वाल राइफल्स की छठवीं बटालियन ज्वाइन की.

वह बीती मई में छुट्टी लेकर घर आया था और 13 जून को वापस यूनिट में गया. बताया जा रहा है कि बीती मंगलवार को ही संदीप ने अपनी मां आशा देवी रावत से फोन पर बात की थी. बताया था कि नवंबर पहले सप्ताह में छुट्टी लेकर घर आ रहा है.

लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था. राइफलमैन संदीप रावत तंगधार में देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया है. दिवाली पर शहीद का तिरंगे में लिपटा शव ही उसके आवास पर आएगा.