81 फीसदी सीएचसी में बुनियादी सुविधाएं नहीं, फिर भी सरकार के दावे आसमान पर

एक तरफ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत और स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी चुनावी रोटियां सेकने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नए-नए शिगूफे छोड़ रहे हैं, तो दूसरी ओर राज्य सरकार को एक करारा झटका लगा है.

उत्तराखंड में 81 फीसदी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रैंकिंग में फेल हो गए हैं. जिसमें छह जिलों के एक भी सीएचसी पर्याप्त दवाओं और चिकित्सा की आपूर्ति, बुनियादी ढांचे और अन्य सेवाओं से संबंधित मानदंडों को पूरा ही नहीं कर पाए और रैंकिंग से ही बाहर हो गए.

ऐसे में अब राज्य में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत क्या होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. बता दें कि एनएचएम के तहत राज्य में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर बनाने के लिए बजट जारी किया जाता है.

लेकिन इसके बाद भी उत्तराखंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के रख-रखाव में राज्य सरकार नाकाम साबित हुई है. खुलासा तब हुआ जब स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से प्रगति रिपोर्ट जारी की गई. हैरानी की बात यह है कि जब टीम ने सीएचसी का दौरा किया तो 59 सीएचसी में से 48 में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिलीं.

हरिद्वार और नैनीताल जिले, जिन्हें स्वास्थ्य के लिहाज से काफी सुविधाजनक माना गया ये जिले भी सीएचसी को सुविधाजनक बनाने में विफल रहे हैं. हरिद्वार में छह में से एक भी नहीं और नैनीताल में सात में से छह सीएचसी को ग्रेडिंग के लिए पात्र ही नहीं माना गया.

उधर देहरादून में चकराता, सहिया, सहसपुर, मसूरी और विकासनगर सहित सात सीएचसी में से पांच को ग्रेडिंग के लिए खारिज कर दिया गया. उत्तराखंड विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाला प्रदेश है. इसीलिए केंद्र सरकार की ओर से रैंकिग में तीस फीसदी छूट पहले से ही दी गई है. लेकिन हैरत की बात यह है कि कई केंद्रों की हालत यह थी कि उन्हें रैंकिंग के लिए चुना ही नहीं गया. ऐसे में स्वास्थय विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठना लाजमी है.

राज्य के सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का यह हाल तब है जब राज्य को गत वर्ष 2 करोड़ 70 लाख रुपये केंद्र सरकार से मिले थे. वहीं पांच लाख रुपये सालाना केंद्रों के रख-रखाव के लिए जारी होते हैं. वहीं इस बजट का विभाग के पास कोई रिकॉर्ड तक नहीं है.

केन्द्र सरकार की ओर से बनाए गए स्टेंडर्ड में स्पेशलिस्ट डॉक्टर, नर्स के साथ एएनएम, लैब टेक्नीशियन, पुरुष महिला के लिए अलग-अलग पब्लिक यूटिलिटी, ऑपरेशन थिएटर, जनरेटर, दो महीने के टीके दवा की उपलब्धता एवं कॉन्ट्रासेप्टिव, 24 घंटे नार्मल-सिजेरियन डिलीवरी सुविधा, बीमार बच्चों के लिए इमरजेंसी केयर, जांच सुविधा, मरीजों को परेशानी होने पर शिकायत दर्ज कराने का सिस्टम, नोटिस बोर्ड पर उपलब्ध सुविधाओं को चस्पा करना, सिटिजन चार्टर की उपलब्धता के साथ जनप्रतिनिधि द्वारा मॉनिटरिंग आदि मानक तय किए गए हैं.

रैंकिंग से बाहर हुए सीएचसी
जिला                 सीएचसी
टिहरी                     5
पौड़ी                      5
उत्तरकाशी               4
पिथौरागढ़                4
अल्मोड़ा                  4
बागेश्वर                    2

डीजी हेल्थ, उत्तराखंड डॉ. कुसुम नरियाल ने कहा, विभाग पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने की कोशिश कर रहा है. विषम परिस्थितियां होने के कारण डॉक्टर भी पहाड़ जाने को तैयार नहीं हैं. कोशिश है कि सभी तरह की सुविधाएं दुर्गम क्षेत्रों के मरीजों को उपलब्ध करायी जा सकें.