जेलों में क्षमता से अधिक कैदी रखे जाने और डॉ. न होने पर गृह सचिव हाईकोर्ट में तलब

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी रखे जाने व उनकी सुविधाओं पर ध्यान न रखने से संबंधित मामले में प्रमुख सचिव गृह को 15 नवम्बर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के निर्देश दिए हैं.

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति बीके बिष्ट की खंडपीठ में इन ‘द मैटर ऑफ प्रिरीजन रीफॉर्म फॉर द डिस्ट्रिक नैनीताल’ संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान हल्द्वानी व नैनीताल के जेल अधीक्षक मनोज कुमार आर्य व्यक्तिगत रूप से पेश हुए.

प्रमुख सचिव गृह की ओर से अदालत में हाजिर माफी इस आधार पर मांगी गई कि वह इस समय सिंगापुर में है. सुनवाई के दौरान अदालत के पूछे जाने पर जेलर द्वारा बताया गया कि हल्द्वानी जेल में कैदी रखने की क्षमता 260 है जबकि वर्तमान में 900 कैदी रखे जा रहे है.

नैनीताल जेल में 71 कैदी रखने की क्षमता है और यहां 95 मुल्जिम रखे गए हैं. इसके अलावा हल्द्वानी जेल में एक फार्मसिस्ट व एक डॉक्टर पार्ट टाईम में रखे गए हैं जो सुबह आते है और कैदियों का स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं. स्वास्थ्य बिगड़ने पर कैदियों को सुशीला तिवारी अस्पताल व सोबन सिंह जीना बेस चिकित्सालय ले जाया जाता है.

कोर्ट में न्यायमित्र द्वारा बताया गया कि पूरे राज्य में दस चिकित्साधिकारी के पद स्वीकृत हैं. जिनके सापेक्ष एक डॉक्टर रखा गया है. लम्बे समय से डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं होने से जेलों में स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी पर नहीं है. खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद 15 नवम्बर अगली सुनवाई की तिथि नियत कर दी.

– Us Sizwalee