अल्मोड़ा जिले में डॉक्टरों की भारी कमी, फार्मासिस्टों के भरोसे अस्पताल | मरीजों की जान सांसत में

अल्मोडा को कुमाऊं की संस्कृति नगरी भी कहा जाता है. इतिहास को खुद में समेटे इस जिले में डॉक्टरों की भारी कमी है. यहां करीब 266 डॉक्टरों की जरूरत हैं, जिसमें सिर्फ 155 डॉक्टर काम कर रहे हैं. हालात यह हैं कि डॉक्टरों और मेडिकल चेकअप की सुविधा के अभाव में सिर्फ फार्मासिस्टों के भरोसे अस्पताल चल रहे हैं.

अल्मोडा मुख्यमंत्री हरीश रावत का भी गृह क्षेत्र है. स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष
व नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट और केन्द्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा सहित कई प्रमुख लोग यहां से ताल्लुक रखते हैं.

सिर्फ यही नहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री एसएस नेगी जिले के प्रभारी मंत्री हैं. इसके बावजूद अल्मोड़ा में डॉक्टरों की भारी कमी हैं. यहां उत्तराखंड गठन के समय से ही डॉक्टरों की कमी होने लगी थी.

खुद अल्मोड़ा विधायक मनोज तिवारी अपनी ही सरकार के खिलाफ डॉक्टरों की कमी को लेकर 2012 में धरने में बैठे. लेकिन आज हालात उससे भी बदतर हैं. सीएमओ खुद मान रहे हैं कि डॉक्टरों की भारी कमी है. वह व्यवस्था बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ केन्द्रों से डॉक्टरों को मुख्यालय में अटैच कर रहे हैं.

पिथौरागढ, चंपावत सहित अन्य जिलों से भी मरीज अच्छे इलाज की उम्मीद में अल्मोड़ा पहुचते हैं, लेकिन यहां अस्पताल में धूल खा रही मशीनों और डॉक्टरों की कमी के कारण उन्हें हल्द्वानी रेफर करना पड़ता है.

यही नहीं करोड़ों की लागत से बने अस्पतालों के भवन टूटने के कगार पर पहुंच गए हैं, क्योकि वहां डॉक्टरों की कमी के कारण अस्पताल ही नहीं खुले. कई प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ऐसे भी हैं, जहां फार्मेसिस्ट अस्पतालों को चला रहे हैं.