पाकिस्तान आतंकवाद को रोके, तभी बातचीत सफल होगी : महबूबा मुफ्ती

जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को कहा कि पाकिस्तान को भारत के साथ किसी भी बातचीत के लिए राज्य में सीमापार आतंकवाद रोकना होगा. महबूबा ने यह बात यह रेखांकित करते हुए कही कि वर्तमान स्थिति में बातचीत संभव नहीं जो ‘और भी खराब हुई है.’

महबूबा ने इसके साथ ही कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत बहाल होने को लेकर वह आशावान रहती हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अटल बिहारी वाजपेयी की नीति को आगे बढ़ाना चाहते हैं. महबूबा ने कहा कि क्षेत्र में शांति स्थापना में पाकिस्तान की बहुत बड़ी भूमिका है और उसे आतंकवाद का समर्थन देना बंद करना होगा.

महबूबा ने श्रीनगर से करीब 14 किलोमीटर दूर जेवान में पुलिस शहीदों की याद में आयोजित एक कार्यक्रम के इतर संवाददाताओं से कहा, ‘यह कोई छुपी हुई बात नहीं है कि घुसपैठ होती है और सीमाओं पर मुठभेड़ होती हैं. पाकिस्तान की यह देखने की भूमिका है कि घुसपैठ नहीं हो और आतंकवाद का कोई समर्थन नहीं किया जाए.’

उन्होंने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर में जब आतंकवाद का ग्राफ नीचे आएगा तब दोनों देशों के लिए बातचीत के अधिक अवसर होंगे. तब बातचीत सफल होगी.’

महबूबा ने याद किया कि वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान पाकितान ने कहा था कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं करने देगा और सीमाओं पर संघषर्विराम था, आतंकवाद नीचे था और घुसपैठ कम थी.’

उन्होंने कहा, ‘यद्यपि दुर्भाग्य से वह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई.’ उन्होंने कहा, ‘हमारे प्रधानमंत्री वहां (पाकिस्तान) गए. अब उन्हें (तत्कालीन राष्ट्रपति) परवेज मुशर्रफ के जम्मू कश्मीर में आतंकवाद का समर्थन नहीं करने के वादे को दोहराना होगा और बातचीत के लिए एक अनुकूल माहौल निर्मित करने में मदद करनी होगी.’

महबूबा ने कहा कि पाकिस्तान स्वयं आतंकवाद का सामना कर रहा है. उन्होंने कहा कि देश को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं हो. उन्होंने कहा कि उनके राज्य का एक हित है ‘क्योंकि भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव का सबसे बड़ा प्रभाव उस पर होता है.’