राज्यपाल केके पॉल ने दोबारा सरकार को लौटाई लोकायुक्त की फाइल

उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल ने राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति से संबंधित फाइल एक बार फिर कुछ आपत्तियों के साथ राज्य सरकार को वापस लौटा दी है.

राजभवन से लोकायुक्त की फाइल लौटाए जाने को राज्य सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. दो महीने से भी कम समय में यह दूसरा मौका है जब राज्यपाल ने राज्य सरकार द्वारा लोकायुक्त के लिए सुझाए गए नामों से सहमति न व्यक्त करते हुए उसे वापस लौटा दिया है.

देहरादून में आधिकारिक सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की कि राज्यपाल ने राज्य सरकार द्वारा भेजी गई लोकायुक्त की नियुक्ति संबंधी फाइल उसे एक सप्ताह पूर्व वापस भेज दी है.

हालांकि, उन्होंने फाइल वापस लौटाए जाने के कारणों का खुलासा करने से इंकार कर दिया और कहा कि इसमें राजभवन ने अपनी कुछ आपत्तियां प्रकट की हैं.

इससे पहले, 25 अगस्त को भी राज्यपाल ने राज्य सरकार को नियमों और कानूनों का पालन करते हुए लोकायुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने के निर्देशों के साथ फाइल लौटा दी थी.

उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति का मसला लंबे समय से लटका पड़ा है. साल 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी के कार्यकाल में विधानसभा ने सर्वसम्मति से भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़े हथियार के रूप में राज्य का लोकायुक्त विधेयक पारित किया था, जिसे बाद में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी भी मिल गई थी.

हालांकि, अगले ही साल 2012 में विजय बहुगुणा के नेतृत्व में आयी कांग्रेस की सरकार ने लोकायुक्त कानून में कई खामियां बताते हुए उसे निरस्त कर दिया और उसकी जगह विधानसभा से एक नया लोकायुक्त विधेयक पारित कराया.

हालांकि, राज्य में नया लोकायुक्त कानून बनने के बाद भी अब तक लोकायुक्त का पद खाली पड़ा है और उसकी नियुक्ति नहीं हो पाई है.