सीएम हरीश रावत का ‘फतवा’, 9 महीने में खुद मुख्यमंत्री ही भूल गए

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने नौ महीने पहले जिसे गोद लिया था वह उसे ही भूल गए हैं. मुख्यमंत्री की इस अनदेखी से ग्रामीणों की उम्मीद की किरणें भी टूटती जा रही है.

नौ महीने पहले मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हरिद्वार जिले के फतवा गांव को गोद लिया था. अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर न सिर्फ इसकी जानकारी दी थी, बल्कि समस्याओं के समाधान की भी आस जगाई थी.

अपने गांव की उपेक्षा से आहत ग्रामीणों ने अब मुख्यमंत्री पर गांव की अनदेखी का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि अधिकारियों की ओर से दिखाए गए सपनों पर भी पानी फिरता नजर आ रहा है. करीब 4500 की आबादी वाले लक्सर तहसील के फतवा गांव को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने करीब नौ महीने पहले गोद लिया था.

इसकी जानकारी 19 फरवरी, 2016 को डीडीओ एसएस शर्मा ने ग्रामीणों की बैठक में दी थी. साथ ही कहा था कि अब इस गांव के ग्रामीणों को किसी भी समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा. लेकिन यह बातें भी हवा हवाई साबित हुईं. अब मुख्यमंत्री को इस गांव को गोद लिए हुए करीब नौ महीने बीत चुके हैं, लेकिन गांव में विकास कार्य कराना तो दूर मुख्यमंत्री ने नौ महीने के अपने कार्यकाल में एक बार भी गांव में आकर झांका तक नहीं.

ग्रामीणों का कहना है कि आए दिन मुख्यमंत्री हरीश रावत का हरिद्वार दौरा होता रहता है. इसके बावजूद उन्होंने पिछले नौ महीने में एक बार भी गांव की ओर रुख नहीं किया. उन्होंने बताया कि विधानसभा चुनाव के लिए प्रतिदिन कोई न कोई जनप्रतिनिधि गांव में जनसभा कर रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री हरीश रावत गोद लेने के बाद भी फतवा गांव को भूल गए हैं.

ग्राम प्रधान अनिल कुमार सैनी का कहना है कि मुख्यमंत्री की ओर से फतवा गांव को गोद लेने के बाद उनकी ओर से गांव में आज तक कोई विकास कार्य नहीं हो पाया है. इससे ग्रामीण खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं.

गांव की यह मुख्य समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं और अब चुनाव भी करीब हैं…

  • गांव में ओवरहेड टैंक नहीं होने से ग्रामीणों को दूषित पेयजल पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
  • गांव में पेयजल के लिए लगाए गए हैंडपंप में से करीब 80 प्रतिशत खराब हो चुके हैं.
  • फतवा गांव से अलावलपुर गांव जाने वाला मुख्य मार्ग क्षतिग्रस्त है, जिससे आए दिन ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ रही है.
  • गांव में बने सीसी मार्ग के किनारे नालियां नहीं होने पर रास्ते में जलभराव की समस्या है.
  • गांव में करीब 90 प्रतिशत हिंदू होने के बावजूद कोई श्मशान घाट नहीं है.
  • गांव में बिजली सप्लाई देने वाली विद्युत लाइन जर्जर अवस्था में है. फॉल्ट की समस्या आम हो गई है.
  • स्वास्थ्य संबंधित कोई सुविधा गांव में उपलब्ध नहीं है. इससे ग्रामीणों को मामूली इलाज के लिए भी रुड़की और हरिद्वार का रुख करना पड़ता है.