हल्द्वानी : महिला आयोग ने लोक आदालत लगाकर हाथों-हाथ सुलझाई महिलाओं की समस्याएं

उत्तराखंड महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजनी कैन्त्यूरा की अध्यक्षता में ब्लॉक सभागार हल्द्वानी में महिला लोक अदालत आयोजित हुई. आयोग की अध्यक्ष ने इस मौके पर कहा कि लोक अदालतों में आने वाले आवेदनों में पूरी जानकारी नहीं होने के कारण वादों का निस्तारण नहीं हो पाता है. इसलिए आवेदकों को अपना पूरा व्यौरा देना चाहिए. गुरुवार को महिला लोक अदालतों में घरेलू हिंसा आदि के 13 मामले पंजीकृत हुए, जिसमें से 07 मामलों का निस्तारण मौके पर ही किया गया.

आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि उनके द्वारा सभी जिलों में अब तक 35 लोक अदालतें लगाई गई हैं. जिनमें लगभग 300 महिला उत्पीड़न की समस्याएं आयी, जिसमें से 150 समस्याओं का निस्तारण किया गया. शेष समस्याओं का निदान प्रगति पर है. उन्होंने कहा कि महिला लोक अदालत लगाने का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के उत्पीड़न की समस्याओं का निस्तारण के साथ ही उन्हें जागरुक करना व उनके अधिकार, कर्तव्य व कानूनी जानकारियां देना है.

उन्होंने कहा कि पीड़ितों को चाहिए कि वे आवेदन पत्र में अपनी घटना का विस्तार से सुस्पष्ट वर्णन करें, जिससे उनके मामले को आसानी से समझा जा सके. उन्होंने कहा कि कई ऐसे भी आवेदन आते हैं, जिसमें प्रार्थी का नाम पता-साफ नहीं होता है, न ही मोबाइल नंबर होता है. जिससे उनसे सम्पर्क भी नहीं हो पाता है.
उन्होंने कहा कि ज्यादातर मामले घरेलू हिंसा के होते हैं, लेकिन अब दुष्कर्म जैसे मामले भी आने लगे हैं. उन्होंने कहा कि देखा जाता है कि कई महिलाएं खुलकर अपनी समस्या को नहीं कह पाती हैं. इसके लिए हमारे अधिकारी व स्वयं सेवी संस्थाओं को ही उन्हें अपनी बात खुलकर बताने के लिए प्रेरित करना होगा. उन्होंने कहा कि महिला व महिला समूहों को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करना भी हमारा लक्ष्य है.

महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में महिला लोक अदालतें लगाई जाएंगी ताकि महिलाओं को उनके क्षेत्र मे जाकर जागरुक कर उनकी समस्याओं का निस्तारण किया जा सके. उन्होंने आंगनबाड़ी व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों से कहा कि महिलाओं के लिए संचालित सरकार द्वारा जो योजनाएं चलाई जा रही हैं, उनकी विस्तृत जानकारियां महिलाओं को दी जाए.

लोक अदालत में ऊषा आर्या ने बहू द्वारा उत्पीड़न किए जाने, मीना पांडे ने पति द्वारा शराब पीकर मारपीट करने व परिवार का भरण पोषण न करने, ललिता देवी ने रास्ते में आते-जाते पडोसी द्वारा गाली-गलौज किए जाने, किरण द्वारा पति एवं सास द्वारा मारपीट करने, राधादेवी द्वारा सास-ससुर एवं पति द्वारा दहेज उत्पीडन करने, मीना उप्रेती द्वारा पति व ससुरालवालों द्वारा षडयंत्र कर बच्चों के हिस्से की जमीन बेचे जाने व जान से मारने की धमकी देने, रेनु गोला द्वारा सास-ससुर व पति द्वारा परेशान करने, मंजू राणा, आकांक्षा व पुर्णिमा द्वारा घरेलू हिंसा, हरकीरत कौर द्वारा पानी की समस्या उठाई गई.

लोक अदालत में कनिष्ठ ब्लॉक प्रमुख जया कर्नाटक, बिमला सांगुडी, नीलू नेगी, निर्मला जोशी, शशी वर्मा, हेमा कबडवाल, डॉ. उषा जंगपागी, संगीता टाकूली, बबली वर्मा, नीमा आर्या, हेमा कबडवाल के अलावा सीाओ राजेन्द्र सिह हृयांकी, जिला कार्यक्रम अधिकारी अनुलेखा बिष्ट, प्रोवेजन अधिकारी अंजना गुप्ता, महाप्रबन्धक उद्योग दीपक मुरारी आदि उपस्थित थे.

YOGESH MISRA