देहरादून : सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को दो महीने में सरकारी बंगले खाली करने का निर्देश

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों को अब देहरादून में अपने सरकारी बंगले खाली करने होंगे. राज्य संपत्ति विभाग ने 2 महीने का समय देते हुए आवास खाली करने को कहा है. उत्तर प्रदेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार से इस मामले में जवाब तलब किया था. अब राज्य संपत्ति विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी आवास खाली करने को कह दिया है.

राज्य संपत्ति विभाग ने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को 16 दिसंबर तक सरकारी आवास खाली करने को कहा गया है. साथ ही अभी तक के किराये की वसूली के लिए आंकलन करके शीघ्र ही वसूली करने को भी कहा गया है.

राज्य सपंत्ति विभाग के सचिव चंद्रसिंह नपलच्याल ने पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, नारायण दत्त तिवारी, भुवन चंद्र खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक और विजय बहुगुणा को आवास खाली करने को लेकर चिट्ठी भेजी है और आवास खाली करने को कहा है.

दरअसल यह मामला उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों के मामले में याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सुर्खियों में आया था. सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी सुविधाएं और आवास के मामले को वैधानिक नहीं माना था. सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को पूर्व मुख्यमंत्रियों से सुविधाएं वापस लेने और किराया वसूली के आदेश दिए थे.

इसको ध्यान में रखते हुए नैनीताल हाईकोर्ट में भी एक संस्था ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों को लेकर याचिका डाली थी. जिसपर हाईकोर्ट ने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को तो नोटिस भेजे ही थे साथ ही सरकार से भी पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास और सुविधाओं के संदर्भ में जवाब-तलब किया था.

राज्य संपत्ति विभाग के आवास खाली करने के आदेश में कहा गया है कि उत्तराखंड में भी पूर्व मुख्यमंत्री आवास स्थान आवंटन नियमावली-1997 ही लागू है. इसलिए सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास खाली करने होंगे.

कुछ समय पहले तक उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों को शेडो या गनर, 1 पीए और 2 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, पीए के बदले 85 हजार तक का ओएसडी, 1 चौकीदार या टेलीफोन अटेंडेंट, 2 वाहन डीज़ल-पेट्रोल सहित, आवास रंगाई-पुताई सहित की सुविधाएं मिल रहीं थीं. हालांकि कुछ समय पहले हरिद्वार के भगवानपुर में हुई कैबिनेट की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्रियों से सुविधाएं वापस लेने का फैसला हुआ था. लेकिन सरकारी आवास की सुविधा बनी रहने दी गई थी.

कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास की सुविधा बनी रहने के लिए राज्य कैबिनेट की बैठक में सहमति बनी थी, इसलिए आवास खाली कराने को लेकर भी कैबिनेट की मंजूरी जरूरी हो सकती है.

इस मामले का एक पहलू ये भी है कि एनडी तिवारी को छोड़कर बाकी पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, भुवन चंद्र खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक और विजय बहुगुणा बीजेपी में हैं. बहरहाल, पूर्व मुख्यमंत्रियों के खर्चे का बोझ सरकार पर पड़ने को लेकर कई बार मुद्दा उठता रहा है. देखना होगा कि राज्य संपत्ति विभाग के दो महीने में सरकारी आवास खाली करने के इस आदेश का क्या रिजल्ट आता है.