अब तो पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले खाली करने ही पड़ेंगे, शासनादेश तैयार

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों को जल्द ही अपना आवास खाली करना होगा. इसके लिए शासन स्तर पर शासनादेश जारी करने की तैयारी हो चुकी है. नैनीताल स्थित हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने भी इस पर सहमति दे दी है. भीतरखाने कहा जा रहा है कि इसका शासनादेश जारी तक कर दिया गया था, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते इसे ऐन वक्त पर रोक लिया गया.

उत्तराखंड में एक पूर्व मुख्यमंत्री को छोड़कर सभी पूर्व मुख्यमंत्री राजधानी देहरादून के सरकारी बंगलों पर काबिज हैं. दरअसल, उत्तराखंड में ये सिलसिला संयुक्त उत्तर प्रदेश की नियमावली को आधार बनाकर शुरू किया गया. पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी को छोड़कर इस मामले में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस और विपक्ष बीजेपी का रुख एक जैसा ही है.

इन सरकारी आवासों के रखरखाव पर हर वर्ष भारी-भरकम खर्च किया जा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास सहित अन्य सुविधाएं दिए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका की सुनवाई चल रही है. जब इस संबंध में हाईकोर्ट ने जवाब मांगा तो सरकार ने उत्तर प्रदेश की नियमावली का हवाला दिया. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री को सरकारी आवास दिए जाने को वाजिब नहीं माना है. लिहाजा माना यह गया कि अब पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए सरकारी आवासों पर बने रहना मुमकिन नहीं होगा.

कुछ समय पहले मुख्यमंत्रियों ने भी हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद सरकारी बंगले खाली करने के संबंध में शपथ पत्र दिया. इस कड़ी में शासन ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास सुविधा समाप्त करने के संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय से सहमति प्राप्त कर ली है. सूत्रों की मानें तो पहले इसका आदेश जारी किया जा रहा था, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते इसे संशोधन के लिए रोक लिया गया. अब संशोधन के बाद इसे एक-दो दिन के भीतर जारी कर दिया जाएगा.