कहीं हरीश रावत सरकार को उल्टा तो नहीं पड़ गया ‘हिटो केदार’ का दांव!

‘हिटो केदार अभियान’ के जरिए केदारनाथ की यात्रा पर निकले साहसिक अभियान दल को नर कंकाल दिखाई दिए और सरकार ने कंकालों के तलाशने का कार्य शुरू कर दिया. आखिर साहसिक पर्यटन का नारा लेकर निकले ट्रैकर्स के इस दल पर भी अब सवाल उठते दिख रहे हैं.

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि ‘हिटो केदार अभियान’ पर गई टीम को नर कंकाल तलाशने के निर्देश भी दिए गए थे, हांलाकि जब ये टीम देहरादून से रवाना हुई थी न तो सरकार ने ही कोई ऐसी बात की थी और न ही इस टीम के किसी सदस्य ने इसकी जानकारी दी थी.

अब केदारघाटी में 31 नर कंकाल मिलने के बाद ये चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि चुनाव से चंद महीने पहले नर कंकाल का जिन्न बाहर निकालने के कहीं राजनीतिक मायने तो नही हैं.

मुख्यमंत्री ने बीजेपी पर बेजा राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी को तो शवों पर राजनीति करने की आदत है, जिस दौरान आपदा आई थी इस समय की सरकार ने कुछ दिन शवों को तलाश करने के बाद ऑपरेशन बन्द करने का निर्णय लिया था, सवाल तो उनसे पूछा जाना चाहिए की ऐसा क्यों किया गया.