रुद्रप्रयाग : शासन-प्रशासन की पोल खोल रहे हैं त्रियुगीनारायण ट्रैक पर पड़े 50 से ज्यादा नर कंकाल

more than 50 skeletons were found on triyuginarayan track
केदारनाथ आपदा को तीन साल से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है, लेकिन जितने बड़े स्तर पर अब नरकंकाल मिल रहे हैं, उससे स्पष्ट तौर पर सरकार और प्रशासन की पोल खुल गई है. सरकार और प्रशासन ने उस वक्त तमाम दावे किए थे. पीड़ितों को मुआवजा भी दिया गया था. लेकिन अब मिल रहे नरकंकाल उनकी विश्वसनीयता पर सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री हरीश रावत बार-बार सुरक्षित केदारनाथ (चारधाम) यात्रा का दावा भी करते हैं. लेकिन इन तीन सालों में किसी ने भी उस आपदा के दौरान गायब हुए लोगों को पैदल ट्रैक मार्गों पर खोजने की कोशिश तक नहीं की. अगर यह कोशिश की गई होती तो आज इतनी बड़ी संख्या में नरकंकाल मिलने से हर कोई भौचक्का और शासन-प्रशासन शर्मसार नहीं होता.

रुद्रप्रयाग जिले में त्रियुगीनारायण-केदारनाथ ट्रैक पर करीब 50 नरकंकाल देखे जाने की खबर है. शुक्रवार देर शाम लौटे ग्रामीणों के खोजी दल का दावा है कि सभी कंकाल 12 किलोमीटर के बीच चार-पांच स्थानों पर बिखरे हुए हैं. अभी तो सिर्फ एक ट्रैक पर मिले नरकंकालों की बात हो रही है. अन्य मार्गों पर न जाने कितने बिखरे होंगे और इन तीन सालों में न जाने कितने तो पूरी तरह से मिट्टी में मिल गए होंगे और कितने बरसात में बह गए होंगे.

दूसरी ओर मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देश पर पुलिस महानिरीक्षक (आइजी) संजय गुंज्याल के नेतृत्व में 22 सदस्यीय दल भी शनिवार को मौके के लिए रवाना हुआ है. दल के साथ डॉक्टरों की टीम भी है. यह टीम नरकंकालों का डीएनए इकट्ठा कर अंतिम संस्कार भी करेगी.

त्रियुगीनारायण से ग्रामीणों का एक 15 सदस्यीय दल वास्तविकता का पता करने ट्रेक पर गया. शुक्रवार देर रात दल वापस लौटा. दल में शामिल त्रिजुगीनारायण गांव के सुधामा प्रसाद भट्ट और मीनाक्षी घिल्डियाल ने बताया कि यह ट्रैक 25 किलोमीटर लंबा है.

जब उनका दल आगे बढ़ा तो महज सात किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद गौरीमाई खर्क नामक स्थान से ही उन्हें नरकंकाल दिखने शुरू हो गए. भट्ट के अनुसार यहां से 12 किलोमीटर दूर गुमकोड़ा तक करीब पांच से छह जगह पर नरकंकाल पड़े हैं.

ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों में इनकी संख्या 10 से 12 तक है. ग्रामीणों का आरोप है कि साल 2013 में केदारनाथ आपदा के बाद सरकार ने इस ट्रैक पर सही तरीके से सर्च ऑपरेशन नहीं चलाया. इसका ही नतीजा है कि तीन साल बाद भी नरकंकाल मिल रहे हैं.

रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी डॉ. राघव लंगर ने बताया कि क्षेत्र में देहरादून और केदारनाथ से एसडीआरएफ और पुलिस का दल गया है. दल के लौटने पर ही नरकंकालों की सही संख्या का पता चल पाएगा. गौरतलब है कि पिछले दिनों इस रूट पर ट्रैकिंग पर गए दल ने यहां नरकंकाल देखे थे और मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी दी थी.