हरिद्वार : बस ड्राइवर को चोर समझ लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला, दो हिरासत में

धार्मिक नगरी हरिद्वार के नगर कोतवाली क्षेत्र के ललतारौपुल पुल के पास स्थित सुदर्शन आश्रम में घुसे निजी परिवहन कंपनी गढ़वाल मोटर्स ऑनर्स (जीएमओ) के बस ड्राइवर को आश्रम के लोगों ने चोर समझकर पीट पीटकर मार डाला.

बस ड्राइवर चमोली जिले का रहने वाला था. ड्राइवर के भतीजे की शिकायत पर पुलिस ने आश्रम के संत और एक संस्कृत छात्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके दोनों को हिरासत में ले लिया है.

शुक्रवार देर रात आश्रम के प्रमुख संत रघुवीर दास ने पुलिस को सूचना दी कि उनके आश्रम में घुस आए एक व्यक्ति की बुरी तरह पिटाई कर दी गई. सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और अचेतावस्था में मिले अधेड़ व्यक्ति को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

पुलिस पड़ताल में मृतक की पहचान 52 वर्षीय लखपत सिंह नेगी पुत्र देवसिंह निवासी गांव चरी, जिला चमोली के रूप में हुई है. कोतवाली प्रभारी योगेंद्र पाल सिंह भदौरिया ने बताया कि मृतक जीएमओयू की बस चलाता था.

कोतवाल ने बताया कि लखपत सिंह देर रात आश्रम के बगल वाले होटल से होते हुए आश्रम की छत पर पहुंच गया था. आश्रम वालों ने चोर समझकर उसकी बुरी तरह पिटाई कर दी, जिससे लखपत सिंह की मौत हो गई. होटल के सीसीटीवी कैमरे की रिकार्डिंग में मृतक अंदर जाते हुए दिखाई दे रहा है.

आखिर वह होटल के अंदर क्यों गया, इसका पता नहीं चल पाया. कोतवाल का कहना है कि इससे पहले शुक्रवार देर रात ड्राइवर लखपत सिंह ने अपने कंडक्टर महकार सिंह के साथ ऋषिकुल के पास एक ढाबे पर खाना खाया था. इसके बाद लखपत वहां से चला गया था.

कोतवाल ने बताया कि मृतक के भतीजे अनिल नेगी ने संत रघुवीर दास, संस्कृत छात्र सुमित बडोनी पुत्र सुभाष चंद्र निवासी गांव भटवाड़ा पट्टी नैलचामी जिला टिहरी गढ़वाल हाल निवासी सुदर्शन आश्रम के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है.

आश्रम प्रमुख रघुवीर दास से मिलने कई संत, नेता और पहाड़ी महासभा के सदस्य पहुंचते रहे. देर रात से ही कोतवाली में ही जमावाड़ा लगना शुरू हो गया था. मुख्यमंत्री के पूर्व ओएसडी पुरुषोत्तम शर्मा, पूर्व पार्षद दिनेश जोशी, महेश गौड़, जेपी बडोनी, विपुल डंडरियाल, अजय नेगी सहित अनेक नेता कई घंटों तक कोतवाली में डटे रहे.

मृतक के भतीजे अनिल नेगी ने बताया कि गुरुवार को चचेरी बहन की अस्थायी राजधानी देहरादून में सगाई थी और चाचा लखपत सिंह नेगी भी वहां थे. उनकी तबियत ठीक नहीं थी. उन्हें तब कुछ देर के लिए अस्पताल में भर्ती भी कराना पड़ा था. शुक्रवार को जरूरी काम की बात कहकर देहरादून से चले आए. अनिल ने बताया कि लंबे समय तक औलाद न होने पर उन्होंने एक बेटी गोद ली हुई थी.