हरिद्वार : कपड़ों की दुकान में लगी भयंकर आग, लाखों की स्कूल ड्रेस स्वाहा

धार्मिक नगरी हरिद्वार के ज्वालापुर में रेलवे फाटक के पास जयसिंह एंड कंपनी (स्कूल ड्रेस की दुकान) की तीसरी मंजिल में लगी आग से कई लाख का माल स्वाह हो गया. आग पर काबू पाने के लिए क्रेन की मदद से तीसरी मंजिल की दीवार तोड़नी पड़ी. पांच दमकल वाहनों की मदद से करीब चार घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका.

अग्निकांड से इलाके में अफरातफरी का माहौल रहा. यातायात व्यवस्था संभालने में भी पुलिस को पसीना बहाना पड़ा. अग्निकांड का कारण शार्ट सर्किट माना जा रहा है. शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे रेल चौकी से कुछ ही दूरी पर स्थित जयसिंह एंड कंपनी दुकान की तीसरी मंजिल से धुआं निकलता देख दुकान मालिक वीरेंद्र जयसिंह ने रेलवे स्टेशन चौकी को सूचना दी.

तभी चौकी से एक दीवान प्रदीप मलिक और अन्य पुलिसकर्मी पहुंच गए. चूंकि तीसरी मंजिल पर आग लगी थी लिहाजा दूसरी मंजिल पर रखे सामान को फटाफट नीचे फेंका गया. सीएफओ राजेंद्र सिंह खाती भी दमकलकर्मियों के साथ पहुंच गए. तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों पर जगह न होने के कारण दमकलकर्मी दीवार पर सीढ़ी लगाकर छत पर पहुंच गए. लेकिन धुआं इतना था कि उन्हें नीचे आना पड़ा.

आनन फानन में नगर निगम से क्रेन मंगवाई गई. क्रेन से तीसरी मंजिल की दीवार दो जगह से ढहा दी गई. फिर आग पर काबू पाने की कवायद शुरू हुई. मायापुर एवं सिडकुल फायर स्टेशन के पांच दमकल वाहनों की मदद से आग पर काबू पाने में करीब चार घंटे लग गए. सीएफओ राजेंद्र सिंह खाती ने बताया कि संभवत शार्ट सर्किट ही आग का कारण हो सकता है. शनिवार को वे घटनास्थल का मौका मुआयना करेंगे. अग्निकांड में कई लाख का नुकसान हुआ है.

हरिद्वार, हैरानी की बात यह है कि तीसरी मंजिल पर एक भी रोशनदान तक नहीं था और न ही अग्निशमन उपकरण का इंतजाम था. सीढ़ियां भी बेहद ही संकरी थी और उस पर भी सामान ठूंस-ठूंसकर रखा हुआ था. क्योंकि, तीसरी मंजिल और छत को गोदाम के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था.

हरिद्वार, एक बारगी तीन दमकलकर्मी साहस का परिचय देते हुए दीवार पर सीढ़ी लगाकर छत पर पहुंच भी गए थे पर जब उन्होंने देखा कि छत से उतरने वाले रास्ते पर भी धुआं ही धुआं है और अंदर जाने का रास्ता दिखाई ही नहीं दे रहा है तो धुएं से उनका भी दम घुटने लगा. उन्होंने नीचे खड़े सहकर्मियों से इशारे में बात की फिर इशारा मिलने पर वे नीचे लौट आए.