केदारनाथ : त्रिजुगीनारायण के पास मिले दर्जनों नरकंकाल, यहां नहीं चलाया गया था सर्च अभियान

साल 2013 की केदारनाथ त्रासदी के केंद्र केदारघाटी में एक बार फिर नर कंकाल मिले हैं. शेरसी से केदारनाथ के लिए 3 अक्टूबर को निकले ट्रैकिंग दल को 7 अक्टूबर को दर्जनों की संख्या में नरकंकाल दिखाई दिए हैं.

ट्रैकिंग दल पहले शेरसी से मयाली टॉप के रास्ते केदारनाथ के लिए जा रहा था, लेकिन रास्ते में पानी न होने के कारण ट्रैकिंग दल ने अपना रुख त्रिजुगीनारायण की ओर किया. ट्रैकिंग दल ने जब त्रिजुगीनारायण से केदारनाथ की ओर पैदल सफर शुरू किया तो 9 कि.मी. गोमपुडा स्थान से नर कंकाल मिलने शुरू हो गए.
कपड़ों में ढके दिखे नर कंकाल

स्थानीय निवासी अशोक सेमवाल ने बताया कि लगभग 10 से 12 किमी ट्रैक में उन्हे दर्जनों कंकाल दिखाई दिए हैं. अशोक सेमवाल ने बताया कि कुछ कंकाल कपडों के ढके हैं. वहीं ट्रैकिंग दल के दूसरे सदस्य अरुण जमलोकी ने बताया कि त्रिजुगीनारायण से केदारनाथ, करीब 27 किमी का सफर है.

16-17 जून, 2013 की आपदा के बाद जब रामबाडा का नामोनिशान मिट गया तो फिर जगंलचट्टी से लेकर रामबाड़ा और रामबाड़ा से केदारनाथ ट्रैक के बीच जो श्रद्वालु जिंदा बच गए, वे अपनी जान बचाने के लिए पहाड़ियों की ओर भागे. लेकिन भूख, बारिश, बीमारी और ठंड की वजह से उनकी मौत हो गई.

आपदा के कई दिनों के बाद पुलिस, सेना, एनडीआरएफ और आईटीबीपी ने गौरीकुंड से लेकर केदारनाथ के जंगलों में सर्च ऑरपेशन चलाया था. उस दौरान भी राहत बचाव कार्य में केदारनाथ के 9 अलग-अलग पैदल मार्गों में काम्बिंग ऑपरेशन नहीं चलाया गया है.

माउन्टेनियर्स एंड ट्रैकिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज रावत ने बताया कि वे शुरू से ही इस बात को उठा रहे थे कि इन पैदल ट्रैक पर नर कंकाल हो सकते हैं. मनोज रावत ने कहा कि सभी ट्रैकिंग रूट की पूरी जानकारी राज्य सरकार को सौंप दी गई है.

राज्य सरकार ने त्रिजुगीनारायण से केदारनाथ पैदल ट्रैक रूट पर आपदा में मारे गए यात्रियों के नर कंकाल के लिए आईजी संजय गुंज्याल के नेतृत्व में टीम का गठन कर दिया है. जो पूरे पैदल ट्रैक पर माटा के सदस्यों के साथ नर कंकालों के डीएनए सैंपल जमा करने के बाद अंतिम संस्कार करेगी.