चुनाव नजदीक आते ही अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचे हरीश रावत के मंत्री

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री हरीश रावत के मंत्री भी अब चुनावी मोड में आ चुके हैं. वैसे तो मंत्री पूरे राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन चुनावी मौसम शुरू होते ही ज्यादातर मंत्री अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में ही ज्यादातर समय बिता रहे हैं. तमाम मंत्रियों ने विधानसभा चुनाव में जीत के लिए अपने क्षेत्रों में ही फोकस करना शुरू कर दिया है.

विधानसभा चुनावों नजदीक आते ही मंत्रियों को भी चिंता सताने लगी है. सभी विधायक तो अपने क्षेत्रों में समय दे ही रहे हैं. लेकिन सरकार के मंत्रियों ने अब राज्यभर के दौरों को छोड़कर अपने विधानसभा क्षेत्रों में ही डेरा जमाना शुरू कर दिया है. सरकार के कुछ मंत्रियों के दो-चार कार्यक्रम अपने विधानसभा वाले जिलों से अलग दूसरे जिलों में तो लगे हैं, लेकिन ज्यादादर मंत्री अपने जिलों में ही सिमट रहे हैं.

हालांकि मंत्री अभी देहरादून तो आते हैं, क्योंकि देहरादून के चक्कर लगाना उनकी मजबूरी भी है और सरकारी कामकाज की जरूरत भी. लेकिन ज्यादातर मंत्रियों ने अब अपने विधानसभा क्षेत्रों में ही फोकस करना शुरू कर दिया है. इस बात को चकराता क्षेत्र से विधायक और राज्य के गृह मंत्री प्रीतम सिंह भी स्वीका करते हुए कहते हैं कि हालांकि विकास कार्य राज्य की जनता के लिए किए जाते हैं, लेकिन अपने विधानसभा क्षेत्र में समय बिताना बेहद जरूरी है.

सरकार के मंत्रियों में हालांकि विकासनगर से विधायक बने नवप्रभात और बद्रीनाथ से विधायक बने राजेंद्र भंडारी अभी कुछ महीनों से ही मंत्री हैं. इसलिए मंत्री के रूप में राज्यभर का दौरा करने के लिए इन दोनों मंत्रियों को समय कम मिला है. बाकि मंत्रियों ने हालांकि राज्यभर के दौरे तो किए हैं, लेकिन चुनावी मोड में अब अपनी विधानसभा पर ही नजर है.

राज्य सरकार में कद्दावर मंत्री इंदिरा हृदयेश हल्द्वानी से, यशपाल आर्य बाजपुर से, सुरेंद्र सिंह नेगी कोटद्वार से, हरीश दुर्गापाल लालकुंआ से, मंत्रीप्रसाद नैथानी देवप्रयाग से, प्रीतम सिंह चकराता से, प्रीतम पंवार यमनोत्री से, दिनेश धन्नै टिहरी से, नवप्रभात विकासनगर से और राजेंद्र भंडारी बद्रीनाथ सीट से विधायक हैं.

माना जा रहा है कि सरकार के मंत्रियों में कोई ऐसा मंत्री नहीं है जो कि इस चुनाव में अपना विधानसभा क्षेत्र बदलना चाहता है. लेकिन इतना जरुर है कि सभी मंत्री अपनी विधानसभाओं में अपनी पकड़ को मजबूत बनाने की कोशिशें कर रहे हैं. चुनाव हैं और चुनाव का डर सबको लगता है.