खूबसूरत चोपटा का होना था औली की तर्ज पर विकास, लेकिन प्रशासन सोया पड़ा है

विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल चोपटा को शीतकालीन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का सपना आज तक हकीकत में नहीं बदल पाया है. सीमांत चमोली जिले में समुद्रतल से 12 हजार फीट की ऊंचाई पर लगभग दस वर्ग किमी क्षेत्र में फैले इस ढलान वाले बुग्याल (मखमली घास का मैदान) में औली की तरह स्कीइंग की सभी संभावनाएं मौजूद हैं.

लेकिन, इसके लिए जिम्मेदार लोगों को इधर झांकने की भी फुर्सत नहीं है. साल 2015 में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) व पर्यटन विभाग ने कुछ पहल जरूर की थी, लेकिन फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया.

जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग से 70 किमी दूर मंडल-गोपेश्वर मार्ग पर स्थित पर्यटन स्थल चोपटा सहित आसपास के करीब दस वर्ग किमी क्षेत्र में फैली ढलानदार पहाड़ियों पर स्कीइंग शुरू करने की मांग लंबे समय से उठती रही है. इसके बावजूद पर्यटन विभाग ने कभी इसे गंभीरता से नहीं लिया.

पिछले साल जरूर निम व पर्यटन विभाग ने संयुक्त रूप से कुछ स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण दिया था. लेकिन, फिर छोटे स्तर पर आयोजन कर जिम्मेदारी से मुक्ति पा ली गई. वह भी तब, जब पर्यटन विभाग पूर्व में कई बार इसे औली की तर्ज पर स्कीइंग स्थल के रूप में विकसित करने के दावे कर चुका है.

जिला पर्यटन अधिकारी पीके गौतम के मुताबिक चोपटा में स्कीइंग शुरू कराने को लेकर प्रस्ताव शासन को भेजा गया था. स्वीकृति मिलने पर ही आगे की कार्यवाही संभव हो पाएगी.

चोपटा सहित आसपास के क्षेत्र में जनवरी-फरवरी के दौरान बर्फ की पांच फीट तक मोटी चादर बिछी रहती है. इस दौरान गोपेश्वर-मंडल मार्ग भी बंद हो जाता है, जिससे पर्यटक क्षेत्र के खूबसूरत बुग्यालों तक नहीं पहुंच पाते. जो पर्यटक जाने का साहस जुटाते भी हैं, उन्हें चोपटा से नौ किमी पहले मक्कू बैंड से ही वापस लौटना पड़ता है. कारण, यहां पर्यटकों के खाने-ठहरने की कोई सुविधा नहीं है.

बता दें कि चोपटा में बना गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) का अतिथि गृह नब्बे के दशक से बंद पड़ा है. प्रतिबंधित वन क्षेत्र में होने के कारण कोर्ट के आदेश पर इसे बंद कर दिया गया था. स्थानीय लोगों के छोटे-छोटे होटल यहां जरूर हैं, लेकिन इनमें सुविधाएं नाममात्र की ही हैं.