हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से पूछा, पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास खाली कराने के लिए क्या किया?

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार को 12 दिन का समय देते हुए उससे यह स्पष्ट करने को कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों के कब्जे वाले सरकारी बंगलों को खाली कराने के लिए उसने क्या किया.

पदमश्री से सम्मानित मानवाधिकार कार्यकर्ता अवधेश कौशल द्वारा इस संबंध में 2010 में दायर की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार 19 अक्टूबर तक यह स्पष्ट करे कि पूर्व मुख्यमंत्रियों के कब्जे वाले सरकारी बंगलों को खाली कराने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं.

याचिकाकर्ता के वकील कार्तिकेयन गुप्ता ने बताया कि अदालत ने यह निर्देश पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा अपने वकीलों के जरिए अदालत को यह बताने के बाद दिया कि सरकारी आवास राज्य सरकार द्वारा आवंटित किए गए हैं और उसके कहने के बाद ही उन्हें खाली किया जा सकता है.

पूर्व मुख्यमंत्रियों पर टाल-मटोल वाला रवैया अपनाने की बात कहते हुए गुप्ता ने उनके इस ताजा रुख पर आश्चर्य जताया और कहा कि 30 सितंबर को हुई पिछली सुनवायी में उन्होंने अदालत से कहा था कि वे सरकारी बंगले खाली करने को इच्छुक हैं.

स्वयं सरकारी बंगले खाली करने के पूर्व मुख्यमंत्रियों के इरादे पर संदेह व्यक्त करते हुए गुप्ता ने दलील दी कि वे जानबूझकर मामले को लटका रहे हैं. ऐसे में अदालत को ही बंगले खाली करने का आदेश देना होगा. पहली बार अदालत में पेश हुए पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के वकील ने नेता की बीमारी का हवाला देते हुए सरकारी बंगला खाली करने के लिए छह माह का समय मांगा.

पद से हटने के वर्षों बाद भी लखनऊ में सालों से सरकारी बंगलों पर काबिज उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को उन्हें खाली करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कौशल ने पिछले महीने उत्तराखंड हाईकोर्ट से छह साल पहले दायर इसी प्रकार की याचिका पर जल्द सुनवाई का अनुरोध किया था.

याचिकाकर्ता का कहना है कि जब राज्य मानवाधिकार आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाएं किराये के भवनों से काम कर रही हों तो पूर्व मुख्यमंत्रियों का पद से हटने के बावजूद सालों से सरकारी आवासों पर कब्जा बनाए रखना तर्कसंगत नहीं है.

उन्होंने बताया कि मानवाधिकार आयोग को अपने कार्यालय भवन का 1.20 लाख रुपये प्रतिमाह किराया देना पड़ रहा है. याचिका में तिवारी के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी, विजय बहुगुणा, भगत सिंह कोश्यारी और रमेश पोखरियाल निशंक के नाम शामिल हैं.