पिथौरागढ़ : त्योहारी सीजन और बैंक-एटीएम में पड़ा रुपयों का सूखा, पाई-पाई को मोहताज लोग

सीमांत जिले पिथौरागढ़ में अधिकारियों, शिक्षकों और डॉक्टरों की कमी तो आए दिन देखने को मिलती है. इन दिनों यह जिला करंसी के संकट से जूझ रहा है. आलम यह है कि पिछले करीब एक महीने से जिले में करंसी का ऐसा संकट बना हुआ है कि सब कुछ थम सा गया है. त्योहारी सीजन में करंसी के संकट से आम जन तो परेशान हैं ही, कारोबार भी चौपट होने लगा है.

पिथौरागढ़ नगर हो या यहां की तहसीलें या फिर छोटे कस्बे सभी जगह करंसी के लिए हाहाकार मचा हुआ है. आलम यह है कि जिले के बैंक और एटीएम नकदी नहीं होने से हफ्तों से हाथी दांत बने हुए हैं. बैंकों के पास नगद धनराशि नहीं होने से लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है.

उधर बैंकों के साथ ही प्राइवेट कारोबार भी चौपट होने की कगार पर पहुंच गया है. यह पहला मौका है जब पिथौरागढ़ के लोग पाई-पाई के लिए तरस रहे हैं. जिला व्यापार संघ के अध्यक्ष पवन जोशी का कहना है कि नगद पैसे नहीं होने से ग्राहक दुकानों की तरफ नहीं आ रहे.

असल में पिथौरागढ़ जिले को नगद करंसी आरबीआई की कानपुर ब्रांच जारी करती है. लेकिन उत्तर प्रदेश में सुरक्षा बल नहीं मिलने से यहां करंसी नहीं पहुंच पा रही है. नियमों के मुताबिक बॉर्डर जिलों में नगद करंसी की रत्तीभर भी कमी नहीं होनी चाहिए और न ही ऐसे जिलों में पुरानी करंसी बाजार में होनी चाहिए. बावजूद इसके यहां लोग पाई-पाई को मोहताज हैं. लीड बैंक के प्रबंधक बीएस धर्मसत्तू का कहना है कि जल्द ही नगदी संकट दूर कर लिया जाएगा.

पिथौरागढ़ में नगदी की कमी से चंपावत और बागेश्वर जिले भी प्रभावित हो रहे हैं. आपातकाल में इन जिलों में पिथौरागढ़ से ही नगदी की कमी दूर की जाती है. ऐसे में सवाल यह है कि इस त्योहारी सीजन में आखिर कब तक बॉर्डर में बसे लोगों अपने ही पैसों के लिए तरसने को मजबूर होंगे.