कोटद्वार : यहां तीन महीने से न गाड़ी आ रही, न सीटी बजा रही है | ‘प्रभुजी’ आपसे ही आस है

गढ़वाल का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले कोटद्वार शहर का पिछले तीन महीने से पूरे देश से रेल सम्पर्क टूटा हुआ है. रेलवे के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब 124 साल पुरानी रेल सेवा पूरी तरह से नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच ठप पड़ी है.

रेलवे के अधिकारियों के पास यहां के लोगों की समस्याओं के लिए वक्त ही नहीं हौ और स्थानीय प्रशासन भी तमाशबीन बना हुआ है. इसका नतीजा यह है कि आम व्यक्ति रेल सेवा ठप होने से बेहद परेशान है. अब तो सिर्फ रेलमंत्री सुरेश प्रभु और पीएम मोदी से ही लोगों को उम्मीद है.

दरअसल बेलगाम हो चले खनन माफिया ने कोटद्वार के निकट सुखरौ नदी पर बने रेलवे ब्रिज के पिलर को खोद कर न केवल इन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया है. बल्कि शासन प्रशासन को भी खुली चुनौती दी है. जानकर हैरानी होगी कि कोटद्वार-नजीबाबाद के बीच पिछले तीन महीने से रेल यातायात पूरी तरह से ठप है.

दरअसल, कोटद्वार के पास सुखरौ नदी पर बने रेलवे पुल का एक पिलर ध्वस्त हो चुका है. इसके चलते रेल यातायात पूरी तरह से ठप है. उत्तर रेलवे के इतिहास में यह पहली बार हुआ है, जब ब्रिटिश कालीन रेलवे स्टेशन तीन माह से वीरान पड़ा है.

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ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार के लिए अंग्रेजों ने 1889 में कोटद्वार तक रेलवे लाइनें बिछा दी गई थी, जिन पर 1892 में माल गाड़ी दौड़ने लगी. लेकिन खनन माफिया ने सुखरौ नदी पर बने रेलवे ब्रिज के पिलर खोद डाले. इस पुल के टूटने से 124 साल पुरानी रेल सेवा पूरी तरह से ठप पड़ी है.