ज्यादातर चीनियों को विवादों पर भारत व अन्य देशों के साथ युद्ध की आशंका

बीजिंग।… एक नवीनतम सर्वे में कहा गया है कि भारत और चीन के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता आम चीनी के जनमानस पर भी हावी है और 30 फीसदी से भी कम लोग भारत के पक्ष में राय रखते हैं. जबकि करीब 60 फीसदी लोगों को आशंका है कि पड़ोसी देशों के साथ चल रहे भूभागीय विवाद ‘सैन्य टकराव’ तक जा सकते हैं.

अमेरिका के प्यू रिसर्च सेंटर के नवीनतम सर्वे में कहा गया है कि मात्र 26 फीसदी लोग भारत को अनुकूल नजरिए से देखते हैं, जिसके साथ चीन के कई भूभागीय विवाद आधी सदी से अधिक समय से चल रहे हैं.

सीमा विवाद के अलावा चीनी मीडिया दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच बढ़ती प्रतिद्वन्द्विता को लगातार प्रमुखता देता रहा है. खास तौर पर चीन में आर्थिक मंदी के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की उच्च विकास दर और बढ़ते भारत-अमेरिका संबंधों की पृष्ठभूमि में चीनी मीडिया ने दोनों देशों की बढ़ती प्रतिद्वन्द्विता को खासा महत्व दिया है.

भारत का चीन से सीमा विवाद है जो कि अरुणाचल प्रदेश पर दावा करता रहा है. साल 1962 में चीन द्वारा अपने साथ मिला लिए गए अक्साई चीन को लेकर भी विवाद है. बीजिंग दक्षिण चीन सागर के संबंध में कई पड़ोसियों के साथ नौवहन विवाद में उलझा है. पूर्वी चीन सागर में विवादित द्वीपों को लेकर जापान के साथ चीन के मतभेद हैं.

जमीनी सीमा के मामले में कुल 14 देशों में से भारत और भूटान ही ऐसे देश हैं, जिनके साथ चीन को सीमा विवाद सुलझाना है. चीनियों में भारत के बारे में जापान की तुलना में बेहतर राय है और 14 फीसदी लोग ही इसमें अनुकूल विचार जाहिर करते हैं, जबकि साल 2006 में यह संख्या 63 फीसदी थी.

बहरहाल, उत्तर कोरिया के साथ चीन के करीबी रिश्तों के बावजूद 55 फीसदी चीनी दक्षिण कोरिया के पक्ष में राय जाहिर करते हैं.