सुस्त रही स्पेक्ट्रम नीलामी, कुल 65789 हजार करोड़ रुपये की बोलियां मिलीं

देश में स्पेक्ट्रम की सबसे बड़ी नीलामी काफी सुस्त रही और शुरू होने के पांच दिन बाद ही यह 65,789 करोड़ रुपये की बोली लगने के साथ समाप्त हो गई. सरकार को हालांकि, इस नीलामी से 5.6 लाख करोड़ रुपये की बोली मिलने की उम्मीद थी.

सरकार ने जितने स्पेक्ट्रम को बोली के लिए पेश की थी, उसके मात्र 40 प्रतिशत के लिए ही कंपनियों ने बोलियां लगाईं. 60 प्रतिशत स्पेक्ट्रम बिना बिके ही रह गया. यहां तक कि 4जी दूरसंचार सेवाओं के लिए जरूरी प्रीमियम बैंड में कोई बोली नहीं आई.

ब्रिटेन की दूरसंचार कंपनी वोडाफोन की भारतीय इकाई वोडाफोन इंडिया इस नीलामी में सबसे ज्यादा सक्रिय रही और उसने 20,000 करोड़ रुपये का स्पेक्ट्रम खरीदा. सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने 14,244 करोड़ रुपये और आइडिया सेल्युलर ने 12,798 करोड़ रुपये की बोली लगाई.

दूरसंचार क्षेत्र में नई नई उतरी रिलायंस जियो ने नीलामी में 13,672 करोड़ रुपये का स्पेक्ट्रम खरीदा है. टाटा टेलीसर्विसेज ने इस दौरान 4,500 करोड़ रुपये की बोली लगाई है और उसने मुंबई में स्पेक्ट्रम बरकरार रखा है जहां इसका लाइसेंस खत्म होने वाला था.

दूरसंचार मंत्री मनोज सिन्हा ने कहा कि जिन सात बैंडों में कुल पेश 2,354.55 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम बिक्री के लिए पेश किया गया था, उसमें से केवल 964.80 मेगाहर्ट्ज के लिए ही बोलियां मिलीं हैं.

सिन्हा ने संवाददाताओं से कहा, ‘सरकार को इस नीलामी में कुल 32,000 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान प्राप्त होगा जो कि पिछले पांच साल के दौरान सर्वाधिक है. दूरसंचार कंपनियां जिन क्षेत्रों में अपनी डेटा सेवाओं को बेहतर करना चाहतीं हैं वहां उन्होंने नीलामी में भाग लिया. हम कुल 964.80 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम बेच पाए हैं.’

सिन्हा से जब यह पूछा गया कि नीलामी में कमजोर प्रतिक्रिया से क्या वह निराश हैं जवाब में उन्होंने कहा कि वास्तव में वह खुश हैं कि सरकार को पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा अग्रिम भुगतान प्राप्त होगा.

स्पेक्ट्रम नीलामी में 700 और 900 मेगाहर्ट्ज के प्रीमियम बैंड में कोई बोली नहीं मिली. सरकार की तरफ से इन बैंडों में नीलामी के लिए ऊंचा आधार मूल्य रखा जाना, इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है. एयरटेल ने नीलामी में जहां 1800, 2100, 2300 मेगाहर्ट्ज में कुल मिलाकर जहां 173.8 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के लिए बोली लगाई है.

आइडिया सेल्युलर ने मुंबई सर्कल में 2100 मेगाहर्ट्ज बैंड हासिल किया है. आइडिया ने कुल 349.2 मेगाहर्ट्ज हासिल किया है और 1800 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज और 2500 मेगाहर्ट्ज के लिए अतिरिक्त स्पेक्ट्रम भी खरीदा है.

रिलायंस जियो ने देश के सभी 22 सर्कलों में 269.2 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम हासिल किया है. रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि हमने अपने स्पेक्ट्रम का विस्तार किया है, जिससे हम अपनी सेवा बेहतर करेंगे.

2जी और 3जी सेवाओं के लिए 1800 मेगाहर्ट्ज के बैंड का प्रयोग किया जा सकता है, जबकि 2100 मेगाहर्ट्ज के बैंड का प्रयोग 3जी और 4जी सेवाओं के लिए किया जा सकता है. 2500 मेगाहर्ट्ज और 2300 मेगाहर्ट्ज 4जी सेवा के लिए प्रयोग होता है और 800 मेगाहर्ट्ज 2जी और 4जी सेवा के लिए प्रयोग होता है.