मानसून के 120 दिनों में 102 लोगों की जान गई, 80 घायल और करीब साढ़े तीन हजार घरों को नुकसान

उत्तराखंड में साल 2013 के बाद इस बार मानसून सीजन आम लोगों पर बेहद भारी गुजरा. मानसून के 120 दिन की अवधि में अतिवृष्टि, बादल फटने व भूस्खलन की घटनाओं ने 102 लोग अपनी जिंदगी से हाथ गंवा बैठे. 80 लोग घायल हुए, जबकि पांच का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है.

इस मानसून सीजन में करीब 3400 घरों को नुकसान पहुंचा है. 147 घर तो पूरी तरह धराशायी हो गए और इनमें रहने वाले परिवारों को दूसरी जगहों पर शरण लेने को विवश होना पड़ा.

मानसून के कहर का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस साल अब तक प्राकृतिक आपदाओं में 116 लोगों की मौत हुई, जिनमें से 102 की मौत तो एक जून से 30 सितंबर (मानसून सीजन) के बीच ही हुई. आपदा में मृत्यु का यह पिछले तीन सालों में सबसे बड़ा आंकड़ा है.

साल 2015 में 56 लोग कुदरत के कहर का निशाना बने थे, जबिक 2014 में यह संख्या 66 थी. इससे पहले साल 2013 की प्राकृतिक आपदा ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया था. इस बार मानसून सीजन में जन के साथ ही पशुधन, खेती, पेयजल व विद्युत योजनाएं, सड़कें आदि को भी बारिश ने खासा नुकसान पहुंचाया है.