ब्रिटेन में भारतीयों का नौकरी हासिल करना होगा मुश्किल, नई आव्रजन नीति बढ़ाएगी मुसीबत

ब्रिटेन ने काम और पढ़ाई के लिए आने वाले गैर यूरोपीय राष्ट्रों के प्रवासियों की संख्या में कटौती करने की योजना की मंगलवार को घोषणा की है. इससे ब्रिटिश कंपनियों के लिए भारत जैसे देशों के पेशेवरों को नौकरी पर रखना मुश्किल हो जाएगा.

ब्रिटेन की गृहमंत्री अंबर रड ने बर्मिंघम में कंजर्वेटिव पार्टी की वार्षिक कांफ्रेंस में बताया कि उनको आव्रजन में कटौती करने के विकल्पों पर विचार करना होगा. उन्होंने कहा, ‘यूरोपीयन यूनियन से बाहर आना तो रणनीति का एक हिस्सा है. अगर हम सच में आव्रजन में कटौती करना चाहते हैं तो हमें आव्रजन के सभी स्रोतों पर विचार करना होगा. हमें काम और पढ़ाई के लिए आने वालों पर भी विचार करना होगा. इसके तहत विदेशों से लोगों को भर्ती करने से पहले कंपनियों की ओर से लिए जाने वाले टेस्ट को कठोर बनाया जा सकता है.’

इस टेस्ट का मकसद यह होगा कि विदेशों से यहां आने वाले लोग यहां की लेबर मार्केट में मजदूरों की कमी को पूरा करें, न कि ब्रिटिश नागरिकों की नौकरियां छीनें. नया कानून काफी सख्त होगा और इससे ईयू के बाहर के देशों जैसे भारत से पेशेवरों को नौकरी देने वाली कंपनियों को ऐसा करने में कठिनाई पेश आएगी.

रड ने कहा, ‘अगर हम अपने लोगों की कार्यक्षमता को नहीं बढ़ा सकते तो हम दुनिया नहीं जीत सकते.’ इसके अलावा उन्होंने घोषणा की कि दिसंबर से ऐसे अप्रवासियों को किराए पर घर या संपत्ति देना अपराध माना जाएगा, जिन्हें ब्रिटेन में रहने का कोई हक नहीं है. इस मामले में संपत्ति के मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी. जो लोग यहां टैक्सी चलाना चाहते हैं उनके लिए भी आव्रजन जांच जरूरी होगी.

अगले साल से बैंक भी नियमित जांच करेंगे कि कहीं उन्होंने भी अपनी जरूरी बैंकिंग सेवाओं में अवैध रूप से रह रहे लोगों को तो नौकरी पर नहीं रखा है. ब्रिटेन की इस आव्रजन नीति का असर भारत में उन लोगों पर भी पड़ेगा, जो वहां जाकर पढ़ने का सपना पाल रहे हैं. वैसे भी ब्रिटेन में पढ़ने वाले भारतीयों की संख्या इस समय इतिहास में सबसे कम है.