मौसम ने ली ऐसी करवट कि आम जन ही नहीं, प्रशासन की भी सांस थम गई

उत्तराखंड में मौसम ने करवट ली तो जगह-जगह आम जन और प्रशासन की सांस थम गई. मंगलवार को मूसलाधार बारिश से पिथौरागढ़ जिले की धारचूला तहसील के खोतिला क्षेत्र में हुए भूस्खलन का मलबा काली नदी में गिरने से झील बनने का खतरा पैदा हो गया था.

यही नहीं, मानिक ग्लेशियर से निकलने वाली रामगंगा नदी के बहाव पर भी नाचनी में झील बनने से ग्रामीण दहशत में आ गए थे. अच्छी बात यह रही कि झील कुछ देर में खुद ही टूट गई. कुनकटिया गांव में आकाशीय बिजली गिरने से मवेशियों की भी मौत हो गई.

उधर गंगोत्री, यमुनोत्री व बद्रीनाथ के साथ ही पिथौरागढ़ की ऊंची पहाड़ियों पर हिमपात हुआ. कई स्थानों पर बारिश भी हुई. इस सबके चलते पर्वतीय इलाकों में हल्की ठंडक भी महसूस की जाने लगी है.

उधर, मौसम विभाग के अनुसार आगे भी उत्तराखंड में आंशिक बादल छाए रहेंगे. कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं. मौसम के तेवर कुमाऊं क्षेत्र में कुछ ज्यादा ही तीखे रहे. वहां लगभग सभी हिस्सों में कहीं हल्की तो कहीं झमाझम बारिश हुई.

धारचूला-खोतिला पैदल मार्ग पर भारी बारिश के चलते भूस्खलन हुआ. इसका मलबा करीब 700 मीटर नीचे काली नदी में जा गिरा. इससे नदी का बहाव नेपाल की तरफ हो गया था. यदि भूस्खलन नहीं थमता तो नदी में बनी झील तबाही का सबब भी बन सकती थी. बारिश से धारचूला-खोतिला पैदल मार्ग बह गया. गनीमत रही कि इससे पहले क्षेत्र के गांवों के बच्चे और लोग वहां से निकल चुके थे.

मुनस्यारी तहसील के नाचनी क्षेत्र में रामगंगा नदी में झील बन जाने से ग्रामीण दहशत में आ गए. असल में रामगंगा में हरड़िया गदेरा मिलता है. पिछले तीन-चार महीने से इस नाले से बड़े पैमाने पर मलबा रामगंगा में गिर रहा है.

हरड़िया से रसियाबगड़ तक नदी का प्रवाह थम गया और झील बन गई. इससे नाचनी सहित पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. कुछ लोगों ने गांव छोड़ना तक शुरू कर दिया था. सूचना पर पुलिस-प्रशासन के साथ ही अन्य विभागों की टीम भी मौके पर पहुंच गई. नदी किनारे के इलाकों में घोषणा कर दी गई. इससे पहले कि प्रशासन कोई कदम उठाता, झील टूट गई. इसके बाद ही लोगों ने राहत की सांस ली.