नैनीताल : गंभीर बीमारी से जूझ रहे बीडी पाण्डे अस्पताल के हालात पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

वैसे तो नैनीताल का जिला अस्पताल यहां के लोगों के इलाज के लिए बना है, लेकिन खुद अस्पताल ही बीमार पड़ा हुआ है. बदहाली के हालात यह हैं कि अस्पताल की यह बीमारी अब लाइलाज हो चली है. खुद जिले के स्वास्थ्य विभाग के मुखिया अपना दुखड़ा रो रहे हैं. विभाग की लापरवाही पर अब हाईकोर्ट का हंटर चला तो अफसरों की नींद खुली है.

नैनीताल का बीडी पाण्डेय जिला अस्पताल भले ही एकमात्र बड़ा सरकारी अस्पताल है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है. अस्पताल मे यदि कोई गंभीर रूप से बीमार मरीज आ जाए तो उसकी जान जोखिम में पड़ सकती है. ऑक्सीजन सप्लाई बिजली से होती है. यानी बिजली गई तो मरीज की जान जोखिम में. अस्पताल में तीन इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर की जरूरत है, लेकिन सिर्फ एक ही तैनात है.

लम्बे समय ये पैथालॉजिस्ट और ईसीजी टेक्निशियन भी अस्पताल के पास नहीं हैं. लोग लम्बे समय से मांग करते आ रहे हैं, लेकिन हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती अब भी नहीं हुई है. नैनीताल में कार्डियाक केयर यूनिट की स्थापना होनी थी, लेकिन यह कवायद भी सिर्फ डीपीआर तक सिमट कर रह गई है. इमरजेंसी के समय ज्यादा मरीज आने पर यहां डॉक्टर नहीं फोर्थ क्लास कर्मचारी भी इलाज करते दिखायी पड़ते हैं.

नैनीताल में ही रहने वाले वकील सी.के. शर्मा का दावा है कि जिला अस्पताल की हालत बद से बदतर होती जा रही है. सुविधाएं हैं नहीं और यहां इलाज के लिए आने वाले लोगों की जान मुश्किल में पड़ जाती है.

सरकारी अस्पताल की सुविधाएं भला कैसे सुधरेंगी, जब विभाग के अफसर ही तमाम संसाधनों की कमी का रोना रोने लगें. बदहाली पर एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई, जब सुनवाई हुई तो कोर्ट के सवाल सुनकर स्वास्थ्य महकमे की नींद उड़ गई. कोर्ट ने पूछा कि कार्डियाक सेंटर पर डीपीआर के अलावा क्या किया गया, तो जवाब ही नहीं मिला. डॉक्टरों की कमी और दूसरे स्टाफ की जरूरत के मुताबिक तैनाती क्यों नहीं की जा रही, तो जिले के सीएमओ भी इस बात का जवाब नहीं दे पाए.

हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि प्रमुख सचिव स्वास्थ्य तत्काल जरूरी स्टाफ की तैनाती करें और शपथपत्र के जरिए कोर्ट को जानकारी दें. सीएमओ एलएम उप्रेती कहते हैं कि जिला अस्पताल में जरूरत के मुताबिक स्टाफ नहीं है, लेकिन यह उनके अधिकार क्षेत्र में भी नहीं है. अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ की तैनाती के लिए शासन को कवायद करनी है.

नैनीताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में देसी और विदेशी के पर्यटक आते हैं. हाईकोर्ट भी यहीं पर मौजूद है. लिहाजा बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थानीय लोगों के साथ-साथ सभी को जरूरत है. लेकिन जिला अस्पताल न सिर्फ बीमार है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी लाचार हैं. सवाल है कि महकमे के बड़े अफसर कब चेतेंगे और क्या कभी बीमार बीडी पाण्डेय जिला अस्पताल, पूरी तरह स्वस्थ हो पाएगा?