पीडीएफ को लेकर हरीश रावत सरकार और कांग्रेस संगठन में पड़ी दरार

उत्तराखंड सरकार में शामिल प्रगतिशील लोकतांत्रिक मोर्चा (पीडीएफ) के समर्थन को लेकर कांग्रेस संगठन और सरकार के बीच जारी विवाद बढ़ता जा रहा है.

मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा इस मसले पर खुलकर पार्टी कार्यकर्ताओं की बयानबाजी करने पर नाराजगी जताने के बाद पार्टी अध्यक्ष किशोर उपाध्याय द्वारा इस संबंध में नसीहत जारी करने के बावजूद रविवार को वरिष्ठ कांग्रेस पदाधिकारियों ने सरकार पर पीडीएफ के समर्थन के नाम पर कांग्रेस संगठन को हाशिये पर धकेलने का आरोप लगाते हुए इन प्रयासों का कड़ा विरोध किया.

प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष एसपी सिंह, साहित्य संवर्धन कांग्रेस के अध्यक्ष आनंद सुमन सिंह, मुख्य प्रवक्ता मथुरादत्त जोशी, महामंत्री तरुण पंत, प्रदेश प्रवक्ता आरपी रतूड़ी, हरीकृष्ण भट्ट, मनीष कर्णवाल, दीपक बलूटिया, सुरेश गौरी एवं सरिता नेगी ने एक संयुक्त बयान जारी कर राज्य सरकार में शामिल निर्दलीय विधायकों द्वारा बार-बार कांग्रेस संगठन के बारे में की जा रही टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा एक ओर पार्टी संगठन को पीडीएफ पर टिप्पणी न करने की नसीहत दी जा रही है. वहीं दूसरी ओर पीडीएफ के मंत्री कांग्रेस संगठन को पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी का नाम लेकर धमकाने की कोशिश कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘सरकार द्वारा पार्टी संगठन को नसीहत दी जा रही है कि पीडीएफ पर संगठन की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए और उनके बारे में फैसला पार्टी आलाकमान करेगा. वहीं दूसरी ओर सरकार में बैठे लोगों द्वारा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के नाम पर संगठन को धमकाने की कोशिश की जा रही है.’

संयुक्त बयान में कहा गया कि सरकार में शामिल निर्दलीय विधायकों वाले पीडीएफ के नेता कांग्रेस संगठन पर लगातार बयानबाजी करते आ रहे हैं. कांग्रेस नेताओं ने राज्य विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल की भी इस बात के लिए आलोचना की कि वह भी इस संबंध में अपनी ही पार्टी पर उंगली उठा रहे हैं.

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष जैसे गरिमामयी और संवैधानिक पद पर बैठे कुंजवाल को पार्टी संगठन और सरकार के मध्य सामंजस्य बैठाने का कार्य करना चाहिए न कि उस पर उंगली उठाने का. उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष किशोर उपाध्याय द्वारा इस संबंध में खुले तौर पर अपनी राय जाहिर न करने की नसीहत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता चुप हैं लेकिन एक सोची समझी साजिश के तहत पीडीएफ विधायक संगठन पर लगातार टिप्पणी कर रहे हैं जो उचित नहीं है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता का मान सम्मान बचाने का दायित्व पार्टी अध्यक्ष का है, जबकि सरकार चलाने का कार्य सरकार के मुखिया का. हालांकि उन्होंने कहा, ‘सरकार के मुखिया को सरकार चलाने के साथ ही संगठन के कार्यकर्ताओं के मान की भी रक्षा करनी है क्योंकि सरकार संगठन से है, संगठन सरकार से नहीं. आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी कार्यकर्ता के भरोसे ही जाना है, सरकार में बैठे निर्दलीय सदस्यों के भरोसे नहीं.’

उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वह निर्दलीय विधायकों वाले पीडीएफ द्वारा पार्टी संगठन पर की जा रही छींटाकशी को मात्र सरकार बचाए रखने के लिए सहन करना पार्टी के हित में कतई उचित नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि आगामी चुनाव में संगठन के कार्यकर्ता ही लडाएंगे, सरकार में बैठे निर्दलीय नहीं.

गौरतलब है कि पिछले काफी समय से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उपाध्याय विधानसभा चुनावों से पहले सरकार में शामिल छह सदस्यीय पीडीएफ पर अपना रुख स्पष्ट करने की बात कह रहे हैं, जिससे चुनावों के दौरान कांग्रेस को किसी प्रकार की संभावित हानि न हो.

हालांकि, इस बात से खफा पीडीएफ लगातार अध्यक्ष उपाध्याय को निशाना बना रहा है और उनका कहना है कि उन्होंने राज्य सरकार को समर्थन उपाध्याय के कहने पर नहीं बल्कि कांग्रेस आलाकमान के कहने पर दिया था.