पिछले चार महीनों में 65 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कालेधन की घोषणा : अरुण जेटली

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली- फाइल फोटो

देश के भीतर रखे कालेधन को कर दायरे में लाने के लिये शुरू की गई आय घोषणा योजना (आईडीएस) के तहत कुल 65,250 करोड़ रुपये की संपत्ति की घोषणा की गई. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को यह जानकारी दी. योजना चार माह के लिये खुली थी जो कि 30 सितंबर को समाप्त हो गई.

जेटली ने बताया कि योजना के तहत कुल 64,275 घोषणाएं की गईं. उन्होंने कहा जैसे-जैसे ऑनलाइन और दस्तावेज के तौर पर जमा की गई जानकारी को संकलित किया जायेगा कुल राशि का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है. इन घोषणाओं में कुल 65,250 करोड़ रुपये की संपत्ति की जानकारी दी गई है. इसमें कर और जुर्माने के तौर पर सरकार को 45 प्रतिशत राशि मिलेगी.

सरकार ने इस योजना के जरिये अवैध आय और संपत्ति रखने वालों को इसकी घोषणा करने के बाद कर और जुर्माना चुकाकर पाक साफ होने का मौका दिया है. जेटली ने इस बात को दोहराया कि यह एकबारगी घोषणा योजना 1997 की योजना की तरह आम माफी योजना नहीं है. उन्होंने कहा कि 1997 में घोषित स्वैच्छिक आय घोषणा योजना (वीडीआईएस) में केवल 9,760 करोड़ रुपये का कर मिला. इसमें औसतन प्रति व्यक्ति सात लाख रुपये की घोषणा की गई थी. वित्त मंत्री ने कहा कि आईडीएस 2016 के तहत मिलने वाले कर को भारत की संचित निधि में रखा जायेगा और इसका इस्तेमाल जन कल्याण की योजनाओं में किया जायेगा.

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने प्रधान आयकर आयुक्तों को 30 सितंबर को मध्यरात्रि तक काउंटर खोलने के निर्देश दिए थे ताकि घरेलू आय घोषणा योजना (आईडीएस) के तहत लोगों को अपने बेहिसाबी धन की घोषणा करने में सुविधा हो. घोषणा के आखिरी दिन कैबिनेट सचिवालय के नॉर्थ ब्लॉक स्थित सीबीडीटी के ऑफिस में देर रात तक काम चलता रहा.

समय सीमा समाप्त होने के दो घंटे पहले ही कर्मचारी घोषित कालेधन के आंकलन में जुट गए थे. सीबीडीटी चीफ रानी सिंह नायर और राजस्व सचिव हसमुख अधिया के निर्देशन में चार महीने में घोषित किए गए कालेधन के मूल्यांकन के लिए दिल्ली और मुंबई के वरिष्ठ इनकम टैक्स अधिकारी आधी रात के बाद तक काम करते रहे.

इस योजना को लेकर आशंका थी कि क्या इस बार 1997 में एचडी देवेगौड़ा के कार्यकाल में वित्तमंत्री पी चिदंबरम द्वारा चलाए गए घरेलु आय घोषणा योजना के तहत घोषित हुए 33 हजार करोड़ रुपए का आंकड़ा पार हो सकेगा. उस दौरान चार लाख से अधिक लोगों ने अपनी बेहिसाब संपत्ति का ब्योरा दिया था. इसकी तुलना में पिछले साल विदेशों में जमा कालेधन के रूप में केवल 4164 करोड़ रुपये की घोषणा हुई थी, जिससे टैक्स के रूप में केवल 2428 करोड़ रुपयों की प्राप्ति हुई थी.