नैनीताल : हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से पूछा, ‘खुद ही बता दो कब तक खाली करोगे सरकारी आवास’

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पद छोड़ने के बावजूद सरकारी आवासों पर सालों से काबिज राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों से उन्हें खाली करने की समय-सीमा बताने को कहा.

नैनीताल स्थित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने स्थित एक गैर सरकारी संगठन रूरल एनलाइटनमेंट एंड लिटिगेशन केंद्र (रूलक) द्वारा इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्रियों से तीन अक्टूबर तक यह बताने को कहा कि वे कब तक सरकारी आवासों को खाली कर देंगे.

याचिकाकर्ता के वकील कार्तिकेयन ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा सरकारी आवासों को खाली करने के लिए तैयार होने के संबंध में जानकारी दिए जाने के बाद अदालत ने उनसे आगामी सोमवार तक अपनी तरफ से इसकी समय-सीमा बताने को कहा.

याचिका में पूर्व मुख्यमंत्रियों नारायणदत्त तिवारी, भुवन चंद्र खंडूरी, भगत सिंह कोश्यारी, रमेश पोखरियाल निशंक और विजय बहुगुणा से सरकारी आवास खाली कराने का अनुरोध किया गया है.

सुनवाई के दौरान एनडी तिवारी को छोड़कर अन्य सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के वकील मौजूद थे. हांलांकि, राज्य सरकार के वकील की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि वह भी सरकारी आवास छोड़ने को तैयार हैं.

पद से हटने के सालों बाद भी लखनऊ सरकारी बंगलों पर काबिज उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को उन्हें खाली करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रूलक अध्यक्ष पदमश्री अवधेश कौशल ने पिछले महीने उत्तराखंड हाईकोर्ट से साल 2010 में दायर इसी प्रकार की याचिका पर जल्द सुनवाई करने का अनुरोध किया था.

याचिकाकर्ता का कहना है कि जब राज्य मानवाधिकार आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाएं किराए के भवनों से काम कर रही हों तो पूर्व मुख्यमंत्रियों का पद से हटने के बावजूद सालों से सरकारी आवासों पर कब्जा बनाए रखना तर्कसंगत नहीं है. उन्होंने बताया कि मानवाधिकार आयोग को अपने कार्यालय भवन का 1.20 लाख रुपये प्रतिमाह किराया देना पड़ रहा है.