चौबटिया : आतंक के खिलाफ लड़ने के गुर सीख और सिखा रहे हैं भारत-अमेरिकी सैनिक, अभ्यास का आज आखिरी दिन

अल्मोड़ा जिले में रानीखेत के पास चौबटिया के घने जंगलों में भारत और अमेरिका के सैनिक एक-दूसरे को लड़ने का गुर सिखा रहे हैं. पिछले दो हफ्ते से दोनों देशों के सैनिक आपसी विश्वास तो बढ़ा ही रहे हैं, उसके साथ ही एक दूसरे की रणनीति और कार्रवाई करने के तरीके भी सीख रहे हैं. मंगलवार को उनकी इस ड्रिल का यह आखिरी दिन है.

तस्वीरों में देखें : चौबटिया रानीखेत में भारत-अमेरिकी सैनिकों का युद्धाभ्यास

समुद्रतल से करीब 6 हजार से 8 हजार की फीट की ऊंचाई पर आतंकवाद विरोधी अभियान में दोनों देशों की सेनाएं हिस्सा ले रही हैं. इसमें ऑपरेशन की पूरी योजना बनाने से लेकर आतंकवादियों को मार गिराना तक शामिल है. यह अभ्यास छह किलोमीटर के मुश्किल मार्च और हर जवान की पीठ पर 30 किलोग्राम की युद्ध सामग्री के साथ शुरू हुआ था, ताकि जवानों की शारीरिक क्षमता की अग्निपरीक्षा हो सके.

ये अभ्यास दोनों सेनाओं के लिए रेड, कॉर्डन और सर्च ऑपरेशन में काफी मददगार साबित होगा. इस दौरान स्टेट ऑफ द आर्ट उपकरण के इस्तेमाल पर जोर दिया गया. जैसे सर्विलांस के उपकरण के इस्तेमाल की कला, आतंकवादियों पर नजर रखना, उनकी पहचान करना और नजदीकी लड़ाई में कैसे विशेष हथियारों का इस्तेमाल कर आतंकियों का मार गिराया जाए जैसी चीजें शामिल हैं.

इस अभ्यास का मुख्य मकसद दोनों सेनाओं के बीच सूचनाओं की अदला-बदली कर ऑपरेशनों में लड़ने की अपनी क्षमता को बढ़ाना है. ध्यान रहे, भारत और अमेरिका के बीच एक-दूसरे के सैनिक अड्डे इस्तेमाल करने संबंधी समझौते के बाद यह पहला अभ्यास है. ये अभ्यास 14 सितंबर से शुरू हुआ है और मंगलवार 27 सितंबर को खत्म हो रहा है. इस अभ्यास में अमेरिका के करीब सवा दो सौ और इतने ही भारत से सैनिक हिस्सा ले रहें हैं.

भारत के पास जहां आतंकवाद से लड़ने का लंबा चौड़ा अुनभव है, वहीं अमेरिका के पास भी अफगानिस्तान और इराक में आतंकवाद से निपटने का अनुभव है. जाहिर है दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे को बहुत कुछ सिखाएंगी, जिससे दोनों देशों की सेनाओं की ऑपरेशनल क्षमता में काफी इजाफा होगा.