रिलायंस जियो ने एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया पर फिर बोला हमला

सांकेतिक फोटो

रिलायंस जियो ने सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) पर नया हमला बोलते हुए कहा कि उसके अंदर वोट के नियम ‘बहुत अधिक पक्षपातपूर्ण और एकतरफा’ हैं और ये मौजूदा ऑपरेटरों भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया के निहित स्वार्थों को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं.

मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली दूरसंचार कंपनी फिलहाल इंटरनकनेक्ट के मुद्दों पर मौजूदा ऑपरेटरों के साथ कटु वाकयुद्ध में लगी है. उसने सीओएआई के नियमों में बदलाव की मांग करते हुए कहा है कि मौजूदा वोटिंग व्यवस्था में उचित, ईमानदारी, जवाबदेही और पारदर्शिता के लोकतांत्रिक सिद्धान्तों का अभाव है.

जियो ने आरोप लगाया कि वोटिंग अधिकार दबदबे वाले ऑपरेटरों (आईडीओ) के पक्ष में झुके हुए हैं. इससे वे संघ के किसी या सभी निर्णयों पर उनका पूरा नियंत्रण है. जियो ने सीओएआई को लिखे पत्र में कहा है, ‘हम सीओएआई के नियमनों और प्रक्रियाओं में संशोधन और बदलाव चाहते हैं. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के तीन सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति का गठन किया जाना चाहिए.

हाल में 4जी सेवाओं के साथ बाजार में उतरने वाली रिलायंस जियो ने सीओएआई के वोटिंग अधिकारों पर हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा दबदबे वाले ऑपरेटरों (आईडीओ) का उसके कुल वोटों में 68 प्रतिशत का हिस्सा है. ऐसे में निर्णय प्रक्रिया पर उनका नियंत्रण हैं. अन्य कोर (मुख्य) सदस्यों को इसमें ‘शून्य’ कर दिया गया है. रिलायंस जियो खुद भी सीओएआई की सदस्य हैं.

जियो ने कहा कि कार्यकारी परिषद में कोर सदस्यों का वोटिंग अधिकार समायोजित सकल राजस्व के आधार पर तय होता है. प्रत्येक आईडीओ के पास वोट की अधिकतम सीमा 7 है. राजस्व के हिसाब से 60.84 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखने वाले तीन आपरेटरों के सात-सात यानी कुल 21 वोट हैं. इनके अलावा चार कोर सदस्यों के पर कुल मिलाकर 10 वोट हैं. इस तरह वोटिंग में दबदबे वाले पुराने प्रमुख ऑपरेटरों (आईडीओ) का हिस्सा 68 प्रतिशत बैठता है.

जियो ने पत्र में कहा है कि इस तरह वीओएआई की पूरी कार्यकारी परिषद पर पुराने बड़े ऑपरेटरों का कब्जा है. कंपनी का कहना है कि आईडीओ ने एक प्रकार से गठजोड़ बनाया हुआ है, जिससे वे सीओएआई में अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति कर सकें. जियो ने इस पत्र की प्रति दूरसंचार मंत्री, दूरसंचार सचिव और ट्राई के चेयरमैन को भेजी है.