पीडीएफ और कांग्रेस की तकरार से सरकार के भविष्य पर नहीं पड़ेगा फर्क : नवप्रभात

परिवहन मंत्री और कांग्रेस नेता नवप्रभात का कहना है कि राज्य सरकार में शामिल पीडीएफ और कांग्रेस संगठन में एक-दूसरे को लेकर छिड़ी तकरार का कांग्रेस या सरकार के भविष्य पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

श्रीनगर गढ़वाल में उत्तराखंड कौशल विकास योजना के तहत विश्व जनजागृति संगठन द्वारा स्थापित कौशल विकास केन्द्र के उद्घाटन करने के बाद उन्होंने यह बात कही. वीरचन्द्र सिंह गढ़वाली मार्ग पर केन्द्र के उद्घाटन के बाद नगरपालिका सभागार में आयोजित संगोष्ठी में भी नवप्रभात ने मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह के साथ शिरकत की.

पीडीएफ और कांग्रेस संगठन की आपसी बयानबाजी पर नवप्रभात ने पीडीएफ की पैरोकारी करते हुए कहा कि राजनीतिक संकटकाल के जो मित्र रहे हैं उनका हमें सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि राजनीति में इस तरह के विवाद होते रहते हैं.

नई रोडवेज बसों की खरीद में घपले के मामले पर उन्होंने कहा कि अभी बाजार में यूरो 4 बसें नहीं आई हैं और नई बसें खरीदी जानी जरूरी थी. उन्होंने कहा कि नई बसों की जरूरत को देखते हुए ऐसा किया गया है और वक्त आने पर यूरो 4 बसों को भी सड़कों पर उतारा जाएगा.

रोडवेज के अनुबंधित ढाबों पर लुटते यात्रियों के मामले पर पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने कहा कि मिली शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए इसका परीक्षण करवाया जा रहा है. नगर स्थित गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों के एकमात्र रोडवेज डिपो की बदहाली पर पूछे गए प्रश्न पर परिवहन मंत्री ने कहा कि इस मामले को वे देखेंगे, उन्होंने कहा कि जिन रोडवेज बस अड्डों पर जगह उपलब्ध होगी, वहां इंदिरा अम्मा कैंटीन खोली जाएंगी.

दूसरी तरफ कार्यक्रम में मौजूद राज्य के मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह का कहना है कि पीपीपी मोड के प्रोजेक्टस में केवल राज्य में नहीं बल्कि पूरे देश में समस्याएं देखने को मिली हैं इसलिए इससे हम सीख लेंगे और अपनी कमियों को दूर करेंगे.

उन्होंने कहा कि यूपी के साथ परिसम्पत्तियों के बंटवारे के मामले पर पूरे राज्य में मौजूद आवास विकास की जमीनों को यूपी से वापस लेने के लिए कोशिशें जारी हैं. राज्य में हुए अधिकारियों के तबादला आदेशों में संशोधन के मामले पर उन्होंने कहा कि नये तथ्य मिलने पर उनपर पुर्नविचार किया गया और इसमें विवाद जैसी कोई बात नहीं है.

श्रीनगर जलविद्युत परियोजना पर एनजीटी के आदेश पर राज्य सरकार द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किए जाने पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि इसका अनुपालन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि वे इस मामले पर हुई देरी का कारण देखेंगे और इसपर जल्द कार्यवाही करेंगे.

गौरतलब है कि एनजीटी में लम्बी सुनवाई के बाद परियोजना संस्था जीवीके को साल 2013 में नगर के निचले व अलकनन्दा नदी से सटे क्षेत्रों में तबाही के लिए जिम्मेदार बताते हुए लगभग सवा नौ करोड़ रुपये प्रभावितों को बतौर मुआवजा दिए जाने के आदेश एनजीटी ने दिए थे. आदेश में एनजीटी ने माना था कि जलविद्युत परियोजना का मलबा ही नगर के निचले क्षेत्रों में हुई तबाही के लिए जिम्मेदार था.

एनजीटी ने राज्य सरकार को परियोजना संस्था से मुआवजा राशि लेकर जांच पड़ताल के बाद आपदा प्रभावितों को मुआवजा राशि वितरण का आदेश दिया था. आदेश के बावजूद एक माह बाद भी राज्य सरकार ने मामले में अब तक कोई कार्यवाही नहीं की है जिससे आपदा प्रभावितों में गुस्सा है.