उत्तराखंड सहित कई राज्यों के विद्वानों की सरकार से अपील, जल्द गठित हो वैदिक शिक्षा बोर्ड

यूनेस्को धरोहर घोषित किए जा चुके वैदिक मंत्रोच्चार और इसके अध्ययन की विधा को बढ़ावा देने एवं इस प्राचीन धरोहर को जीवंत बनाए रखने के लिए वैदिक शिक्षा बोर्ड गठित करने की मांग करते हुए देशभर के वेद विद्यालयों के आचार्यों एवं विद्वानों ने सरकार से इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आग्रह किया है. वहीं सरकार का कहना है कि वह इसके विभिन्न आयामों पर विचार करेगी.

उत्तराखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, हरियाणा जैसे राज्यों से वेद विद्यालयों के आचार्यों एवं विद्वानों की नई दिल्ली में अखिल भारतीय वेद विद्यालय शिक्षक परिषद के तत्वावधान में बैठक हुई. परिषद के एक शिष्टमंडल ने मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री महेन्द्र नाथ पांडे और उपेन्द्र कुशवाहा से मुलाकात की और उनके समक्ष अपनी मांगे रखी. शिष्टमंडल ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को एक ज्ञापन भी सौंपा.

बहरहाल, यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार वैदिक शिक्षा बोर्ड गठित करने के विषय पर विचार कर रही है, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा, ‘वह इस विषय को देखेंगे.’ पूर्व चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी के नेतृत्व वाली समिति द्वारा वैदिक अध्ययन को लेकर अलग बोर्ड बनाने के सुझाव के बारे में पूछे जाने पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह इस विषय के विभिन्न आयामों को देखेंगे.

इससे पहले एक समारोह को संबोधित करते हुए जावडेकर ने कहा था कि दुनिया के अनेक विश्वविद्यालयों में संस्कृत पुस्तकें, स्मृतियों एवं ग्रंथों का अध्ययन किया जा रहा है. सरकार संस्कृत सहित सभी भारतीय भाषाओं को पोषित करने की नीति को बढ़ा रही हैं.

वेद विद्यालय के संस्थापक पी.के. मित्तल ने कहा कि महर्षि संदीपनी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत स्वायत्त संस्थान है और इस प्रतिष्ठान के तहत ही वैदिक शिक्षा बोर्ड बनाया जाना चाहिए.

अखिल भारतीय वेद विद्यालय शिक्षक परिषद के अध्यक्ष डॉ. जय प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि हम श्रुति परंपरा और वैदिक शिक्षण को अक्षुण्ण बनाए रखना चाहते हैं. वैदिक शिक्षा पद्वति अति प्राचीन परंपरा है और इसका संरक्षण जरूरी है. यह वैदिक शिक्षा बोर्ड के माध्यम से संभव है.