पीडीएफ नेताओं को चुभ गए किशोर उपाध्याय के बोल, फिर ‘संकट’ में हरीश रावत सरकार

हरीश रावत सरकार को समर्थन दे रही पीडीएफ और प्रदेश कांग्रेस के बीच जारी जुबानी जंग एक बार फिर दिल्ली दरबार तक पहुंच गई है. इस बार पीडीएफ के तेवर सख्त नजर आ रहे हैं. राजनीतिक सूत्रों की मानें तो पीडीएफ नेताओं ने कांग्रेस आलाकमान से मिलकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय सहित तमाम पार्टी नेताओं की जुबान पर अंकुश लगाने की मांग की है.

इतना ही नहीं, सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि पीडीएफ नेताओं ने आलाकमान से साफ तौर पर कह दिया है कि प्रदेश अध्यक्ष सहित तमाम पार्टी नेताओं की ओर से पीडीएफ को लेकर लगातार की जा रही अनाप-शनाप बयानबाजी पर रोक नहीं लगाई गई तो समर्थन वापसी पर भी विचार किया जा सकता है.

पीडीएफ नेताओं से कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात के दौरान साफ तौर पर कहा कि उन्होंने 2012 में कांग्रेस सरकार को तमाम राजनीतिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा और समझौता होने के बाद समर्थन दिया था. तब से अब तक इसे लगातार जारी रखा है.

हाल के राजनीतिक संकट के दौरान जब सरकार गिर गई और राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया, उस दौरान भी पीडीएफ सरकार के साथ एकजुट रहा. अदालत के आदेश पर हुए फ्लोर टेस्ट के दौरान भी पीडीएफ एक बार फिर अपने वादे पर खरा उतरा, लेकिन अब कांग्रेस पार्टी की ओर से पीडीएफ की मंशा पर ही सवाल उठाए जा रहे हैं. वह भी ऐसे वक्त में जबकि विधानसभा चुनाव नजदीक है.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सहित कुछ पार्टी नेताओं की ओर से जिस तरह की बयानबाजी की जा रही है वह न सिर्फ पीडीएफ-कांग्रेस गठबंधन के लिए सियासी तौर पर खतरनाक है, बल्कि विपक्षी बीजेपी भी इसका पूरा राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर सकती है. ऐसे में पीडीएफ नेताओं का कहना है कि आलाकमान के स्तर पर बयानबाजी पर रोक लगायी जाए.

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों आलाकमान ने मुख्यमंत्री हरीश रावत रावत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को दिल्ली बुलाकर एकजुट होकर काम करने और बयानबाजी पर अंकुश लगाने की बात कही थी. लेकिन आलाकमान की सख्त हिदायत के बावजूद बयानबाजी का दौर थमा नहीं है.

कांग्रेस-पीडीएफ नेताओं के बीच जारी जुबानी जंग ने खतरनाक रुख अख्तियार कर लिया है. पीडीएफ नेताओं की ओर से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत पर सवाल उठाए जाने के बाद किशोर उपाध्याय ने जवाबी हमला बोला है. उन्होंने पीडीएफ के अस्तित्व पर ही सवाल उठाते हुए कहा है कि आखिर यह पीडीएफ क्या है?

किशोर ने कहा कि यदि कांग्रेस, बसपा, यूकेडी और निर्दलीय विधायकों को मिलाकर पीडीएफ नाम का कोई गठबंधन बना है तो सबसे बड़ा दल होने के नाते कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष या फिर सीएम रावत को इस गठबंधन का अध्यक्ष होना चाहिए. जैसा कि केंद्र में यूपीए और एनडीए गठबंधन को लेकर हुआ है. दोनों गठबंधनों में बीजेपी और कांग्रेस पार्टी के अध्यक्षों को गठबंधन का अध्यक्ष बनाया गया.