मुरली मनोहर जोशी के भूमि पूजन के 16 साल बाद भी नहीं बनी अल्मोड़ा की सीवर लाइन

जिला मुख्यालय अल्मोड़ा में चार चरणों में सीवर लाइन बनाए जाने की योजना थी. अभी तक एक ही जोन बनकर तैयार हुआ है. दूसरे जोन में काम नाम मात्र का ही शुरू हुआ है. जगह-जगह लोगों ने नालियों में ही सीवर लाइन को छोड़ रखा है और नगरपालिका मूक दशक बनी हुई है.

अल्मोड़ा में 21 अप्रैल, 2000 में तत्कालीन केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने सीवर लाइन का भूमि पूजन किया था. पहाड़ की नगरपालिकाओं में जब 2000 में सीवर लाइन का काम शुरू हुआ था तो अल्मोड़ा में इस काम के शुभारंभ को देखकर लोग काफी खुश थे.

आज 16 साल बीत जाने के बाद भी सीवर का चार चरणों में से एक ही चरण पूरा हुआ है. एक बार फिर पालिका और जिला प्रशासन ने सीवर लाइन का प्रस्ताव शासन को भेजा है.

आज सीवर लाइन नहीं होने से लोग अपने भवन निर्माण के बाद सीवर को नाले में डाल दे रहे हैं, जिससे नीचे बसे गांव के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. हर बार पालिका से लेकर लोकसभा चुनावों तक सीवर लाइन का मुद्दा जनप्रतिनिधि उठाते हैं, पद पाने के बाद हर कोई अपने वादों को भूल जाते हैं. लोगों में जनप्रतिनिधियों और सरकारों के खिलाफ भारी आक्रोश है.

अल्मोड़ा नगर व आसपास की सीवर लाइन से एक लाख की आबादी को लाभ होगा. लेकिन जल निगम लापरवाह बना हुआ है. अल्मोड़ा दौरे पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इस मामले में संज्ञान लेने की बात कही, अब तो लगता है जब अल्मोड़ा में कोई महामारी फैलेगी तभी सरकार और विभाग की नींद खुलेगी.

कांग्रेस अल्मोड़ा जिले में हुए पिछले 5 सालों की उपलब्धि को गिना रही है, सीवर लाइन के लिए मुख्यमंत्री से बार-बार नगरपालिका अध्यक्ष और विधायक मिल रहे हैं. अभी तक लाइन का कार्य आगे बढ़ाने के लिए कोई राशि स्वीकृति नहीं हुई. कांग्रेस विधायक सीवर लाइन की बात को कम कर अन्य कार्यों को देखने की बात कर रहे हैं.

बीजेपी ने इस सीवर लाइन को बनाने का श्रेय तो लिया, लेकिन उसके बाद बीजेपी भूल गई कि अन्य चरणों में भी लाइन का कार्य होना है. अब बीजेपी इस गेंद को कांग्रेस सरकार के पाले में डाल रही है. इसे अब बीजेपी चुनावी मुद्दा बनाने की बात भी कर रही है.

बीजेपी-कांग्रेस सीवर लाइन को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं. अल्मोड़ा जिला आज के दिन में पक्ष और विपक्ष में शिखर पर हैं, सीएम, स्पीकर, नेता प्रतिपक्ष, केन्द्रीय राज्य मंत्री सहित कई नेता इसी जिले से आते हैं. लेकिन किसी नेता को जिला मुख्यालय की इस हालात की फिक्र नही है.