पीडीएफ केवल झुनझुने के समान, जिसे बजाते रहना है | राज्य की राजनीति के साथ मजाक : कांग्रेस

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय राज्य सरकार में सहयोगी पीडीएफ के औचित्य को ही नकार रहे हैं. उपाध्याय ने तो यहां तक कह दिया कि उत्तराखंड की राजनीति के साथ पीडीएफ एक मजाक है.

बसपा और निर्दलीय विधायकों से बने प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) ने ही संकट के दौर में हरीश रावत की राज्य सरकार बचाने में अहम भूमिका निभाई थी. वह भी तब जब कांग्रेस के अपने साथी कांग्रेस का जहाज छोड़कर बीजेपी की तरफ कूद गए थे. उस समय पीडीएफ के सभी छ: सदस्य कांग्रेस की सरकार बचाने के लिए मजबूती के साथ खड़े थे. लेकिन अब हालात बदले-बदले नजर आ रहे हैं.

पीडीएफ कोटे से सरकार में मंत्री दिनेश धनै ने संगठन पर निशाना क्या साधा. संगठन भी बदले अंदाज में नजर आने लगा है. पीडीएफ पर हमले की अगुवाई खुद संगठन अध्यक्ष किशोर उपाध्याय कर रहे हैं. मीडिया से बात करते हुए किशोर ने कहा कि पीडीएफ का कोई औचित्य नहीं. पीडीएफ केवल झुनझुने के समान है, जिसे बजाते रहना है.

जानकार मानते हैं कि किशोर की नाराजगी पीडीएफ से कम बल्कि मंत्री दिनेश धनै से ज्यादा है. ऐसा इसलिए कि दिनेश धनै टिहरी से विधायक हैं और कभी किशोर भी यहां से विधायक रह चुके हैं. उपाध्याय इन दिनों टिहरी में खासे मुस्तैद नजर आ रहे हैं.

कहा जा रहा है उपाध्याय साल 2017 का विधानसभा चुनाव अपनी पुरानी सीट यानी टिहरी से लड़ना चाहते हैं, लेकिन उनकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा मंत्री दिनेश धनै हैं. धनै को मुख्यमंत्री हरीश रावत का खास माना जाता है. किशोर को डर है कि कहीं टिहरी की सीट पर दिनेश धनै को फिर से चुनाव न लड़ा दिया जाए. वैसे भी किशोर राज्यसभा न भेजे जाने से पहले ही नाराज हैं.