बीजेपी ने की उत्तराखंड तकनीकी विवि के कुलपति के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग

बीजेपी ने उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर पीके गर्ग पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए बुधवार को राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल से इस संबंध में मुख्य सचिव से जांच कराने का अनुरोध किया.

प्रदेश महामंत्री नरेश बंसल के नेतृत्व में अस्थायी राजधानी देहरादून स्थित राजभवन पहुंचे बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपते हुए प्रो. गर्ग द्वारा किए गए कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रकरणों की फेहरिस्त भी दी.

ज्ञापन में कहा गया है कि पिछले डेढ़ साल से प्रो. गर्ग के कुलपति पद का कार्यभार संभालने के बाद से यह विश्वविद्यालय भ्रष्टाचार और भारी अनियमितताओं का अड्डा बन गया है.

बीजेपी ने आरोप लगाया कि प्रो. गर्ग ने आउटसोर्स के माध्यम से सहायक परीक्षा नियंत्रक जैसे महत्वपूर्ण पद पर एक ऐसे व्यक्ति अरुण कुमार शर्मा को 47,000 रुपये प्रति माह की तनख्वाह पर नियुक्ति दे दी जिन्हें पहले ही पांच कॉलेजों से निष्कासित किया जा चुका है.

उन्होंने कहा कि अन्य गड़बडियों के अलावा शर्मा की नियुक्ति राज्य सरकार के उस शासनादेश का भी उल्लंघन है जिसमें कहा गया है कि आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्त किए गए व्यक्ति का वेतन 33 हजार रुपये प्रतिमाह से ज्यादा नहीं हो सकता.

बीजेपी ने इस संबंध में दावा किया कि कुलपति गर्ग ने एक मामले को दबाने के ऐवज में शर्मा को पद पर नियुक्त किया है. ज्ञापन में गर्ग पर देहरादून के महिला प्रौद्योगिकी संस्थान में रहे तत्कालीन निदेशक पर छात्राओं द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों पर सरकारी निर्देशों के बावजूद किसी प्रकार की कोई जांच न कराने का भी आरोप लगाया गया है.

इसके अलावा, बीजेपी ने कुलपति पर असंवैधानिक ढंग से अध्यापकों की नियुक्ति करने तथा अपनी पुत्री तथा विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार एसपीएस रावत की पत्नी को क्रमश: सिस्टम मैनेजर और शोध अधिकारी पदों पर नियुक्त करने का भी आरोप लगाया.

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुलपति गर्ग और उनके चहेते एसपीएस रावत गाडियों और लैपटॉप सहित अन्य सुविधाओं के नाम पर विश्वविद्यालय के धन का जमकर दुरुपयोग कर रहे हैं, जबकि संस्थान धन की कमी से जूझ रहा है.

बीजेपी ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि ज्ञापन में उठाए गए मामलों की पुष्टि के लिए वह मुख्य सचिव या सर्तकता से जांच कराएं, ताकि इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय को बचाया जा सके.