केदारनाथ धाम को संवारने के लिए मोदी सरकार लाई ‘प्रसाद’ योजना

साल 2013 में आए जल प्रलय के बाद अब तक केदारनाथ धाम और आसपास के इलाके अपने पुराने स्वरूप में नहीं लौट पाए हैं. लेकिन अब केदारनाथ धाम को और संवारा जाएगा. तीर्थ स्थल पर बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं और सैलानियों को आसानी हो.

तीर्थ स्थलों और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए केंद्र सरकार ने प्रसाद (पिलग्रिमेज रिजुवनेशन ऑगमेंटेशन ड्राइफ) और हृदय (हेरिटेज सिटी डेवलपमेंटल ऑगमेंटेशन योजना) शुरू की है.

प्रसाद योजना में केदारनाथ धाम को भी शामिल किया गया है. सर्वे की जिम्मेदारी देहरादून स्थित भारतीय मानव सर्वेक्षण को दी गई है. प्रसाद योजना में केदारनाथ धाम सहित देश के 12 स्थलों को शामिल किया गया है. इसमें यूपी के मथुरा, वाराणसी को भी शामिल किया गया है. इसका बजट 100 करोड़ रुपये है.

इसके अलावा कामाख्या, पुरी, अजमेर, अमृतसर आदि स्थल शामिल हैं. हृदय योजना में गया, द्वारिका, वाराणसी, मथुरा को रखा गया. इसमें उत्तराखंड का कोई स्थल नहीं है. हृदय योजना का बजट पांच सौ करोड़ रुपये है.

इन दोनों योजनाओं में केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय सहित अन्य मंत्रालय भी शामिल हैं. तीर्थ स्थलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ इन योजनाओं के तहत सांस्कृतिक विरासत वाले शहरों में विकास कार्य कराए जाने हैं.