जानिए क्या हुआ तब, जब धारचूला के एक भाई ने 3 माह की उम्र में बिछड़ चुकी बहन को 11 साल बाद खोज निकाला

मामला उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद स्थित धारचूला का है। 11 साल पहले धारचूला बाजार मे देवेद्र बत्रा अपने परिवार के साथ रहता था। बाजार मे उसकी रेडीमेड कपड़ो की दुकान थी। सब कुछ ठीकठाक चल रहा था। देवेद्र के दो पुत्र और एक पुत्री थी।

11 वर्ष पूर्व उसकी दुकान मे आग लग गई और देवेद्र बत्रा की आग में जलकर मौत हो गई। इसके बाद उसकी पत्नी लकवाग्रस्त हो गई। कुछ समय बाद वह भी चल बसी। उस वक्त उनकी तीन माह की बेटी भूमिका को क्षेत्र के एक परिवार ने पालने का निर्णय लिया। परिवार के सदस्य उसे अपने साथ लेकर दूर चले गए।

इधर, देवेद्र का बड़ा पुत्र मोहित दुकानों में चाकरी कर छोटे भाई की भी परवरिश करने लगा। इस दौरान मोहित ने दूसरो के यहां चाकरी कर भाई को हाईस्कूल और इंटर तक पढ़ाया। उसका छोटा भाई पालीटेक्निक कर रहा है। अपनी मेहनत के बल पर अब मोहित ने अपनी रेडीमेड वस्त्रो की अपनी दुकान खोली।

दुकान ठीक चलने के बाद उसने 11 वर्ष दूसरे के घर पल रही अपनी बहन को ढूंढना चाहा। बहन को ले जाने वाले परिवार के बारे मे कुछ भी नही जानने के कारण वह हताश था।

उसने इसके लिए पिथौरागढ़ स्थित वरदान संस्था के पदाधिकारियो से संपर्क किया। संस्था की सुमन वर्मा, प्रेमा वर्मा और सावित्री रूआल ने उसके बारे मे ढूंढ खोज करनी शुरू की। लगभग डेढ़ माह के प्रयास के बाद भूमिका के बारे मे पता चला।

उसे पाल पोस कर बड़ा बनाने के लिए अपने साथ ले गई महिला ने दो सप्ताह पूर्व उसे नेपाली बताकर दिल्ली मे एक परिवार के घर पर काम करने के लिए भेज दिया था। वरदान संस्था की अध्यक्षा सुमन वर्मा के अनुसार सूचना मिलते ही उन लोगो के प्रयास से भूमिका को धारचूला लाया गया। जहां पर उसके बड़े भाई मोहित को सौप दिया है।

11 साल बाद भाई बहन के मिलने के दौरान लोगो की आंखे भी छलक उठी। मात्र तीन माह की उम्र मे बिछुड़ चुकी बहन ने जहां अपने भाई को देखा वहीं बहन के लिए तरस रहे मोहित ने भी पहली बार बहन मिलने के बाद काफी खुश है।