पितृपक्ष शुरू, पितरों का श्राद्ध कर उन्हें मुक्ति दें और खुद को धन्य करें

शुक्रवार से पितृ पक्ष प्रारंभ हो गया है. हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद श्राद्ध करना बेहद जरूरी माना जाता है. पितरों की शांति के लिए हर साल भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक के काल को पितृ पक्ष श्राद्ध होते हैं. इसको लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं.

एक मान्यता यह भी है कि पितृ पक्ष के दौरान यमराज पितरों को धरती पर आने की छूट हैं, यानी इस दौरान पितृ आत्माएं आजाद होती हैं. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि पितर अपने परिजनों से श्राद्ध ग्रहण कर सकें.

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मान्यताओं के मुताबिक मरने के बाद अगर किसी मनुष्य का विधिपूर्वक श्राद्ध और तर्पण न किया जाए तो उसे इस लोक से मुक्ति नहीं मिलती. कहा जाता है कि वह भूत के रूप में इस संसार में ही रह जाता है.

ज्योतिषियों का कहना है कि पितरों के नाम पर उचित विधि से श्रद्धापूर्वक किया जाने वाला कर्म श्राद्ध कहलाता है. श्राद्ध पक्ष में पितरों के लिए उनका प्रिय भोजन बनाया जाता है. भोजन को अग्नि, कौवे, गाय और ब्राहमण आदि को अर्पित किया जाता है. पितरों की शांति के लिए सूर्यदेव को जल देकर परिवार में शांति की कामना की जाती है.