बाबा रामदेव के ‘स्वदेशी जिंस’ जल्द, पाकिस्तान-अफगानिस्तान में भी दस्तक देने की तैयारी

योग गुरु रामदेव ने आज कहा कि पतंजलि समूह परिधान क्षेत्र में दस्तक देगा और ‘स्वदेशी जिंस’ इस साल के अंत या अगले साल पेश किया जाएगा। बाबा रामदेव ने यहां संवाददाताओं से कहा कि युवाओं की तरफ से अच्छी मांग है और इसीलिए पतंजलि ने विदेशी ब्रांड से टक्कर लेने के लिये स्वदेशी जींस पेश करने का फैसला किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि समूह रोजमर्रा के उत्पादों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में संभावना तलाशने को तैयार है और भविष्य में पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान में भी दस्तक दे सकता है। रामदेव ने कहा, ‘हमने पहले ही नेपाल और बांग्लादेश में इकाइयां लगायी है और हमारे उत्पाद पश्चिम एशिया पहुंच चुके हैं तथा सउदी अरब समेत कुछ देशों में लोकप्रिय हुए हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हमें गरीब देशों पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि उन देशों से लाभ का उपयोग वहां विकास कायो’ में किया जाएगा।’

रामदेव ने कहा, ‘पाकिस्तान और अफगानिस्ताप में प्रवेश मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर निर्भर करेगा और अगर स्थिति राजनीतिक रूप से अनुकूल रही, वहां इकाइयां लगायी जाएंगी।’ उन्होंने कहा कि कंपनी के उत्पाद कनाडा तक पहुंच रहे हैं। रामदेव ने कहा कि समूह अजरबैजान में भी दस्तक दे चुका है जहां 90 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है और एक प्रमुख उद्योगपति ने उनके उत्पादों में रूचि दिखायी है। उन्होंने कहा कि परिधान के साथ रिफाइंड खाद्य तेल भी इस साल पेश किया जाएगा।

विस्तार के बारे में बाबा रामदेव ने कहा कि पतंजलि समूह नागपुर के मिहान में 40 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में अपनी सबसे बड़ी इकाई लगा रहा है जो उसकी हरिद्वार में पहली इकाई से भी बड़ी होगी। शहर में कुल निवेश 1,000 करोड़ रुपये होगा और इससे महाराष्ट्र में 10,000 से 15,000 युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि सेज से सटे एक निर्यात इकाई लगायी जाएगी क्योंकि नागपुर बेहतर संपर्क उपलब्ध कराता है। पंतजलि मध्य प्रदेश, असम, जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा कर्नाटक में बड़ी इकाइयां लगने की प्रक्रिया में है। इसके अलावा कई स्थानों पर अनुषंगी इकाइयां हैं।

रामदेव ने कहा, ‘रोजमर्रा के उपयोग वाले सामान खंड में हमारा 50 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य है।’ उन्होंने कहा कि पतंजलि गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पेश करने को लेकर प्रतिबद्ध है और अनुसंधान एवं विकास इकाइयां लगायी है जहां करीब 200 वैज्ञानिक काम कर रहे हैं। इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर अनुसंधान एवं विकास के साथ उत्पाद लाने का दबाव बढ़ा है।