…तो नैनीताल की वादियों में सिर्फ घूमने नहीं पहुंचे हैं अरुण जेटली, ये है ‘मिशन’

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली इन दिनों नैनीताल और अल्मोड़ा की वादियों में अपने परिवार के साथ पहुंचे हुए हैं. अगर आप सोच रहे हैं कि वे सिर्फ सैर-सपाटे के लिए पहुंचे हैं तो हो सकता है आप कुछ हद तक ठीक हों, लेकिन बता दें कि वे वह बीजेपी के पार्लियामेंट्री बोर्ड के सदस्य भी हैं. यही नहीं वे उन चुनिंदा चुनावी रणनीतिकारों में भी शामिल हैं, जिनपर बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व का भरोसा है. इसलिए उनकी इस यात्रा को सिर्फ सैर-सपाटा नहीं माना जा सकता.

अस्थायी राजधानी देहरादून के राजभवन में शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री और नैनीताल सांसद भगत सिंह कोश्यारी से जेटली ने लंबी बातचीत की. इसमें जेटली उत्तराखंड बीजेपी की चुनाव रणनीति पर होमवर्क करते दिखे तो कोश्यारी बीजेपी में अपनी स्थिति को और मजबूत करते हुए.

दोनों की बातचीत से यह भी जाहिर हो रहा है कि भविष्य में अरुण जेटली की उत्तराखंड चुनाव में भूमिका खासी महत्वपूर्ण हो सकती है. दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट की बातचीत हुई और कोश्यारी से जेटली ने कुरेद-कुरेद कर प्रदेश में बीजेपी की चुनावी रणनीति और राजनीतिक हालात पर जानकारी हासिल की.

कोश्यारी को लेकर इस समय बीजेपी में कई तरह की चर्चाएं हैं. बीजेपी कोर कमेटी की तीन बैठकों में शामिल न होकर कोश्यारी यह भी जताते हुए लग रहे थे कि वे कहीं न कहीं नाराज हैं. शनिवार को अरुण जेटली से मुलाकात कर कोश्यारी ने यह भी जता दिया कि वे राज्य के उन बीजेपी नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

जेटली ने कोश्यारी से सीधे तौर पर ही पूछा कि राज्य में बीजेपी की चुनाव की तैयारी क्या है. दोनों नेताओं के बीच इसके बाद राज्य में बीजेपी की चुनावी रणनीति पर ही बातचीत हुई. कोश्यारी का कहना था कि पर्दाफाश रैलियों में बीजेपी को बेहतर रिस्पांस मिला. कोश्यारी ने राज्य सरकार की विफलताओं की बात की और यह भी कहा कि बीजेपी में कहीं कोई मतभेद नहीं है.

जेटली और कोश्यारी के बीच की बातचीत को बीजेपी की शीर्षस्थ स्तर पर उत्तराखंड चुनाव को लेकर पनप रही नई रणनीति का इशारा भी माना जा रहा है. जेटली इससे पहले गुजरात विधानसभा चुनाव में भी मुख्य रणनीतिकार के तौर पर काम कर चुके हैं. जेटली के उत्तराखंड प्रवास को 2017 के चुनाव में उनकी भूमिका को तय करने के कदम के रूप में भी देखा जा रहा है.

कोश्यारी का यह भी कहना था कि कांग्रेस के विधायकों में अभी असंतोष बरकरार है. करीब चार विधायक ऐसे हैं जो मुख्यमंत्री से बुरी तरह से नाराज हैं. ऐसे में कांग्रेस में अभी एक और टूट हो सकती है. कोश्यारी ने मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों के बीच की खाई का भी जिक्र किया और पीडीएफ से सरकार के रिश्ते पर भी टिप्पणी की. चुनाव में बीजेपी की जीत को तय बताया और कहा कि बीजेपी में कोई मतभेद नहीं है.

जेटली ने साफ कहा कि सामूहिक जिम्मेदारी से ही बीजेपी को प्रदेश में 2017 में जीत मिलेगी. जेटली का यह इशारा बीजेपी का इस बार कमल को चेहरा बनाकर चुनाव लड़ने की ओर भी इशारा कर रहा है.